गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। साइबर क्राइम सेल और चिलुआताल थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में शुक्रवार को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यह गिरोह साइबर ठगी और निवेश-ट्रेडिंग के नाम पर देश के 14 राज्यों के लोगों से ठगी गई रकम को गोरखपुर के बैंक खातों में मंगवाता था। इसके बाद खातों से रकम निकालकर उसे क्रिप्टोकरेंसी यूएसडीटी (USDT) में बदला जाता था और विदेश भेज दिया जाता था। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क में शामिल पांच अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।

गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों में दो बीटेक के छात्र हैं, जबकि एक आरोपी ट्रेडिंग कंपनी चलाता है। इस मामले ने साइबर ठगी की रकम को बैंकिंग व्यवस्था और डिजिटल माध्यमों के जरिए विदेश भेजने के तरीके को सामने लाया है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।

14 राज्यों के लोगों से जुड़ा ठगी का मामला

पुलिस के मुताबिक, गिरोह साइबर ठगी और निवेश-ट्रेडिंग के नाम पर लोगों से रकम ऐंठने वाले नेटवर्क से जुड़ा था। देश के 14 राज्यों में ठगी का शिकार हुए लोगों की रकम गोरखपुर के बैंक खातों में मंगाई जाती थी।

इसके बाद इस रकम को खातों से निकालकर आगे भेजने की प्रक्रिया शुरू होती थी। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह रकम को क्रिप्टोकरेंसी यूएसडीटी में बदलकर विदेश भेजता था।

इस तरीके से ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा रहा था। बैंक खातों के जरिए रकम प्राप्त करना और फिर उसे डिजिटल संपत्ति में बदलना इस नेटवर्क की प्रमुख गतिविधियों में शामिल था।

हालांकि, किन-किन 14 राज्यों के लोगों से ठगी की गई और कुल कितनी रकम इस नेटवर्क के माध्यम से भेजी गई, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

साइबर क्राइम सेल और चिलुआताल पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

गोरखपुर की साइबर क्राइम सेल और चिलुआताल थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।

इस कार्रवाई के जरिए पुलिस ने ठगी की रकम को बैंक खातों से निकालकर विदेश भेजने वाले नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेनदेन और उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलने से जुड़ी थी।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस नेटवर्क से संबंधित अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। मामले में कुल पांच अन्य आरोपी फरार बताए गए हैं।

फरार आरोपियों के पकड़े जाने के बाद गिरोह की गतिविधियों और उसके संपर्कों के बारे में अतिरिक्त जानकारी सामने आ सकती है।

गिरफ्तार आरोपियों में दो बीटेक छात्र

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि गिरफ्तार पांच आरोपियों में दो बीटेक के छात्र शामिल हैं। इसके अलावा एक आरोपी ट्रेडिंग कंपनी का संचालन करता है।

तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों का इस तरह के मामले में आरोपी के रूप में सामने आना गंभीर विषय है। हालांकि, दोनों छात्रों की अलग-अलग भूमिका और उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत विवरण अभी सामने नहीं आया है।

इसी तरह, ट्रेडिंग कंपनी चलाने वाले आरोपी की कंपनी का नाम और उसके कारोबार से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि गिरोह के भीतर किस आरोपी को कौन-सी जिम्मेदारी दी गई थी और रकम के लेनदेन में उनकी व्यक्तिगत भूमिकाएं क्या थीं।

आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

बैंक खातों में मंगाई जाती थी ठगी की रकम

पुलिस के अनुसार, गिरोह का एक प्रमुख तरीका गोरखपुर के बैंक खातों का इस्तेमाल करना था। साइबर ठगी से प्राप्त रकम इन खातों में मंगाई जाती थी।

इसके बाद रकम को खातों से निकालकर आगे की प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जाता था। बैंक खातों के माध्यम से रकम प्राप्त करने की व्यवस्था इस नेटवर्क की गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा थी।

साइबर अपराधों में ऐसे खातों के इस्तेमाल से रकम के वास्तविक स्रोत और अंतिम प्राप्तकर्ता का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, इस मामले में कितने बैंक खातों का उपयोग किया गया, वे किन लोगों के नाम पर थे और खाताधारकों की क्या भूमिका थी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

इन तथ्यों की जांच से ठगी की रकम के प्रवाह और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

यूएसडीटी में बदलकर विदेश भेजते थे पैसा

पुलिस के मुताबिक, बैंक खातों से निकाली गई रकम को क्रिप्टोकरेंसी यूएसडीटी में बदला जाता था। इसके बाद डिजिटल माध्यम से रकम विदेश भेज दी जाती थी।

यूएसडीटी एक प्रकार का स्टेबलकॉइन है, जिसे अमेरिकी डॉलर के मूल्य से जुड़े रहने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल डिजिटल संपत्ति के लेनदेन में किया जाता है।

हालांकि, क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग अपने आप में अपराध नहीं है। इस मामले में पुलिस का आरोप है कि इसका इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त धन को विदेश भेजने के लिए किया जा रहा था।

रकम किन देशों में भेजी गई, किन डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल हुआ और विदेश में इसे कौन प्राप्त करता था, इन सवालों पर उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट विवरण नहीं है।

पांच फरार आरोपियों की तलाश जारी

गिरफ्तार पांच आरोपियों के अलावा गिरोह से जुड़े पांच अन्य आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

फरार आरोपियों की गिरफ्तारी से नेटवर्क के संचालन, बैंक खातों के इस्तेमाल और क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन से जुड़े अन्य पहलुओं का खुलासा हो सकता है।

पुलिस के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि देश के 14 राज्यों से जुड़ी ठगी की रकम गोरखपुर के खातों तक किस तरह पहुंचती थी और उसके बाद विदेश भेजने की व्यवस्था कौन संभालता था।

इस मामले में अन्य राज्यों की साइबर ठगी की शिकायतों और बैंकिंग लेनदेन से संबंधित जानकारियां भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

निवेश के नाम पर ठगी से सावधान रहने की जरूरत

इस मामले में निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर ठगी का जिक्र सामने आया है। ऑनलाइन निवेश के दौरान लोगों को किसी भी योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए।

अधिक मुनाफे का भरोसा दिलाने वाले अज्ञात व्यक्तियों, संदिग्ध वेबसाइटों और अनजान ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से सावधान रहना जरूरी है।

किसी अपरिचित व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में रकम भेजना या अनजान निवेश लिंक पर अपनी वित्तीय जानकारी साझा करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो वह तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत कर सकता है। इसके अलावा आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

फिलहाल, गोरखपुर साइबर क्राइम सेल और चिलुआताल पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर 14 राज्यों से जुड़ी साइबर ठगी की रकम विदेश भेजने वाले नेटवर्क का खुलासा किया है। गिरफ्तार आरोपियों में दो बीटेक छात्र और एक ट्रेडिंग कंपनी संचालक शामिल हैं। पांच अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। मामले की आगे की जांच में बैंक खातों, रकम के लेनदेन और विदेशी संपर्कों से संबंधित अतिरिक्त तथ्य सामने आने की संभावना है।

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