देवरिया। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में एक डेढ़ साल की बच्ची के लीवर ट्रांसप्लांट कराने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक युवक ने बच्ची का इलाज दिल्ली स्थित एम्स में कराने का भरोसा दिलाकर परिवार से 4.14 लाख रुपये ले लिए। रकम लेने के बाद आरोपी ने परिवार को फर्जी बिल और दस्तावेज भी उपलब्ध कराए, लेकिन जब परिजनों ने एम्स दिल्ली में इसकी जानकारी की तो वहां बच्ची के इलाज या ट्रांसप्लांट से संबंधित कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस से शिकायत की, जिसके आधार पर सलेमपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, देवरिया जिले के सलेमपुर क्षेत्र के रहने वाले एक परिवार की डेढ़ वर्ष की बच्ची गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। डॉक्टरों ने बच्ची के बेहतर इलाज के लिए लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत बताई थी। परिवार अपनी बच्ची की जिंदगी बचाने के लिए इलाज की तलाश में जुटा था। इसी दौरान उनकी मुलाकात लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक युवक से हुई।

आरोप है कि युवक ने खुद को स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा बताते हुए परिवार को भरोसा दिलाया कि वह दिल्ली के एम्स में बच्ची का लीवर ट्रांसप्लांट आसानी से करा सकता है। उसने एम्स में संपर्क होने और इलाज की पूरी व्यवस्था कराने का दावा किया। बच्ची की गंभीर हालत और इलाज की उम्मीद में परिवार उसके झांसे में आ गया।

परिजनों के मुताबिक, आरोपी ने इलाज और ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू कराने के नाम पर उनसे कुल 4.14 लाख रुपये ले लिए। रुपये लेने के बाद उसने अलग-अलग समय पर कुछ बिल और कागजात भी दिए, जिससे परिवार को लगा कि बच्ची के इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

काफी समय बीतने के बाद जब परिवार ने एम्स दिल्ली में संपर्क कर बच्ची के इलाज और ट्रांसप्लांट की जानकारी मांगी तो वहां किसी भी तरह का रिकॉर्ड मौजूद नहीं मिला। एम्स में बच्ची के नाम से न तो भर्ती होने की जानकारी मिली और न ही लीवर ट्रांसप्लांट से जुड़ी कोई प्रक्रिया दर्ज थी। इसके बाद परिवार को अपने साथ हुई ठगी का पता चला।

पीड़ित परिवार ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए सलेमपुर कोतवाली पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपी के खिलाफ जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी ने कितने अन्य लोगों को इसी तरह अपना शिकार बनाया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। आरोपी द्वारा दिए गए दस्तावेजों, बिलों और पैसों के लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं और गंभीर बीमारियों के इलाज के नाम पर होने वाली ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में मरीजों और उनके परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाकर ठग फर्जी अस्पताल संपर्क, इलाज की व्यवस्था और मेडिकल दस्तावेजों का सहारा लेते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी बड़े अस्पताल में इलाज या ट्रांसप्लांट जैसी प्रक्रिया के लिए सीधे अस्पताल प्रशासन से जानकारी जरूर लें और किसी भी व्यक्ति के कहने पर बिना सत्यापन के पैसे न दें।

देवरिया के इस मामले में अब पुलिस की जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि आरोपी ने किस तरह से पूरा जाल बिछाया और क्या इस ठगी में कोई अन्य लोग भी शामिल हैं। फिलहाल परिवार को अपनी बच्ची के इलाज के साथ-साथ ठगी का भी सामना करना पड़ रहा है।

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