जहानाबाद। जहानाबाद कोतवाली क्षेत्र के प्यास गांव में धान की फसल में खरपतवारनाशी कीटनाशक का छिड़काव कर रहे 30 वर्षीय किसान वीरेंद्र पाल की इलाज के दौरान मौत हो गई। वह 22 अगस्त की सुबह अपने खेत में कीटनाशक का छिड़काव करने गया था। दोपहर तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। खेत में वह बेहोशी की हालत में मिला। उसके मुंह से झाग निकल रहा था और पास में कीटनाशक छिड़कने वाली टंकी पड़ी थी।

घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने तत्काल वीरेंद्र को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसकी हालत गंभीर बताई। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में भी शोक का माहौल है।

सुबह खेत में गया था किसान

जानकारी के अनुसार प्यास गांव निवासी वीरेंद्र पाल खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। 22 अगस्त की सुबह वह धान की फसल में खरपतवारनाशी दवा का छिड़काव करने के लिए खेत पर गया था। उस समय परिवार के लोगों को अंदाजा नहीं था कि खेत पर उसके साथ कोई अनहोनी हो सकती है।

वीरेंद्र रोजमर्रा की तरह खेत में दवा का छिड़काव करने गया था। सुबह खेत पर पहुंचने के बाद उसने धान की फसल में खरपतवार नियंत्रित करने के लिए कीटनाशक का छिड़काव शुरू किया।

दोपहर तक जब वह वापस घर नहीं पहुंचा तो परिजनों को चिंता होने लगी। परिवार के लोगों ने पहले आसपास जानकारी की और इसके बाद खेत की ओर उसकी तलाश में निकल पड़े।

खेत में बेहोश मिला

परिजन जब खेत पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। वीरेंद्र खेत में जमीन पर बेहोशी की हालत में पड़ा था। उसके मुंह से झाग निकल रहा था। उसके पास ही कीटनाशक छिड़कने वाली टंकी भी पड़ी थी।

परिजनों ने तत्काल उसे संभाला और उपचार के लिए अस्पताल ले गए। उसकी हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने इलाज शुरू किया। परिजनों को उम्मीद थी कि समय रहते उपचार मिलने से उसकी हालत में सुधार होगा, लेकिन इलाज के दौरान वीरेंद्र ने दम तोड़ दिया।

परिवार में मचा कोहराम

वीरेंद्र की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने बताया कि वीरेंद्र खेती के काम में परिवार का सहयोग करता था और उसकी मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।

गांव में घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। ग्रामीणों ने किसान की मौत पर दुख जताया।

कीटनाशक के इस्तेमाल में सावधानी जरूरी

खेती में कीटनाशकों और खरपतवारनाशी दवाओं का इस्तेमाल फसलों को बचाने और खरपतवार नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, लेकिन इनके छिड़काव के दौरान सावधानी बेहद जरूरी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार दवा की मात्रा, मिश्रण और छिड़काव के तरीके का सही पालन करना चाहिए।

छिड़काव करते समय किसानों को सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। हवा की दिशा को ध्यान में रखकर छिड़काव करना और दवा के सीधे संपर्क से बचना भी महत्वपूर्ण है। खाली हाथ या बिना सुरक्षा साधनों के कीटनाशक का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी मौत की वजह

प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि कीटनाशक के संपर्क में आने के कारण वीरेंद्र की तबीयत बिगड़ी होगी। हालांकि, उसकी मौत का वास्तविक कारण चिकित्सकीय जांच और संबंधित रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

घटना की परिस्थितियों को लेकर स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस और संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि किसान किस प्रकार की दवा का छिड़काव कर रहा था और उसके संपर्क में आने से उसकी तबीयत किस तरह बिगड़ी।

किसानों से सुरक्षा बरतने की अपील

घटना के बाद किसानों से खेती में कीटनाशक और खरपतवारनाशी दवाओं का इस्तेमाल करते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। दवा के पैकेट पर दिए गए निर्देशों के अनुसार ही उसका इस्तेमाल करना चाहिए। छिड़काव के दौरान मास्क, दस्ताने और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दवा के छिड़काव के बाद निर्धारित अवधि तक खेत में प्रवेश न करें और दवाओं को बच्चों तथा अन्य लोगों की पहुंच से दूर रखें।

प्यास गांव में किसान वीरेंद्र पाल की मौत की घटना ने एक बार फिर कृषि कार्य के दौरान कीटनाशकों के सुरक्षित इस्तेमाल की जरूरत को सामने ला दिया है। खेत में बेहोशी की हालत में मिले वीरेंद्र की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिवार ने अपने सदस्य को खो दिया, वहीं घटना के बाद गांव में भी शोक का माहौल है। मौत की वास्तविक वजह जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी।

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