फेस अथेंटिफिकेशन से बदली मजदूरों की हाजिरी, गोरखपुर में 8 गुना तक गिरावट
गोरखपुर : भारत-गारंटी फार रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम-जी योजना में आधार आधारित फेस अथेंटिफिकेशन व्यवस्था लागू होने के बाद गोरखपुर मंडल में मजदूरों की हाजिरी के आंकड़ों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहली नजर में सामने आए आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। पिछले वर्ष मार्च से जून के बीच जहां बड़ी संख्या में मजदूरों ने योजना के तहत काम किया था, वहीं इस वर्ष इसी अवधि में कई जिलों में काम करने वाले मजदूरों की संख्या में कई गुना गिरावट दर्ज की गई है।
फेस अथेंटिफिकेशन व्यवस्था लागू होने के बाद अब मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए आधार से जुड़े चेहरे की पहचान की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करना और फर्जी हाजिरी जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगाना है।
गोरखपुर मंडल के विभिन्न जिलों में इस नई व्यवस्था के बाद मनरेगा जैसे ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों में दर्ज होने वाली मजदूरों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। अधिकारियों के अनुसार, जहां पहले बड़ी संख्या में श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज होती थी, वहीं अब केवल वास्तविक रूप से काम करने वाले मजदूरों की ही हाजिरी दर्ज हो रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल मार्च से जून के बीच कई जिलों में लाखों मजदूरों ने योजना के तहत रोजगार प्राप्त किया था। लेकिन इस साल इसी अवधि में मजदूरों की संख्या में भारी कमी देखने को मिली है। कुछ जिलों में यह गिरावट आठ गुना तक बताई जा रही है।
प्रशासन का मानना है कि फेस अथेंटिफिकेशन प्रणाली से वास्तविक लाभार्थियों की पहचान आसान हुई है। इससे उन मामलों पर रोक लगने की उम्मीद है, जिनमें बिना काम किए मजदूरों के नाम पर हाजिरी दर्ज होने या भुगतान से जुड़ी शिकायतें सामने आती थीं।
नई व्यवस्था के तहत कार्यस्थल पर मौजूद मजदूरों की पहचान मोबाइल आधारित तकनीक से की जा रही है। मजदूर की उपस्थिति दर्ज करने से पहले उसके चेहरे का मिलान आधार रिकॉर्ड से किया जाता है। इससे रोजगार योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल रही है।
हालांकि, कुछ स्थानों पर तकनीकी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, मोबाइल नेटवर्क और तकनीकी जानकारी की कमी के कारण मजदूरों और कर्मचारियों को शुरुआती दौर में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मजदूरों को नई प्रक्रिया समझने में भी समय लग रहा है।
ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य मजदूरों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचाना है। उनका कहना है कि जिन लोगों को वास्तव में रोजगार की जरूरत है, उन्हें काम उपलब्ध कराया जा रहा है और उनकी हाजिरी सही तरीके से दर्ज की जा रही है।
वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोगों का कहना है कि तकनीकी प्रक्रिया के कारण कई बार वास्तविक मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने में दिक्कत आती है। उन्होंने मांग की है कि जहां तकनीकी समस्या हो, वहां वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाए।
फेस अथेंटिफिकेशन को ग्रामीण रोजगार योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार लंबे समय से डिजिटल माध्यमों के जरिए योजनाओं में होने वाली अनियमितताओं को कम करने का प्रयास कर रही है।
गोरखपुर मंडल में सामने आए आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि नई डिजिटल व्यवस्था ने योजना के क्रियान्वयन के तरीके को बदल दिया है। अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तकनीकी चुनौतियों को दूर करते हुए यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है।
अधिकारियों का कहना है कि योजना के तहत जरूरतमंद मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी रहेगी। साथ ही, फेस अथेंटिफिकेशन प्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुधार भी किए जाएंगे, ताकि पारदर्शिता और सुविधा दोनों बनी रहें।