परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने की पहल है शक्ति वाटिका की स्थापना : Ranger
Rajapakad/कुशीनगर: धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने की पहल करते हुए सामाजिक वानिकी प्रभाग ने एक अप्रैल से सात अप्रैल तक शक्ति वाटिका कार्यक्रम का संचालन किया। यह सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय अभियान न केवल प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला साबित हुआ, बल्कि इससे आस्था के स्थलों को भी नई ऊर्जा मिली।
कार्यक्रम के समापन दिवस सोमवार को तमकुहीराज क्षेत्र के डूभा गांव स्थित सम्मय माता मंदिर परिसर में शक्ति वाटिका की स्थापना की गई। इस अवसर पर ग्राम प्रधान विजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों को हरित वातावरण देने के साथ श्रद्धालुओं के लिए एक पावन स्थल का निर्माण करेगी। उन्होंने कहा कि वृक्ष जीवनदायिनी हैं और इनका संरक्षण करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
रेंजर हरिकेश बहादुर नायक ने बताया कि शक्ति वाटिकाओं में ऐसे पौधे लगाए जा रहे हैं जो धार्मिक और औषधीय दृष्टियों से विशेष महत्व रखते हैं। तुलसी, पीपल, नीम, आंवला और बेलपत्र जैसे पौधे न केवल पूजन कार्यों में उपयोगी हैं, बल्कि स्वास्थ्य लाभ भी पहुंचाते हैं। उन्होंने बताया कि अभियान में सभी वर्गों—महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों—की सहभागिता सुनिश्चित कर इसे एक जनांदोलन का रूप दिया गया है। कार्यक्रम में वन दारोगा रमेश गुप्ता, वन रक्षक नंद राव, राकेश कुमार आदि उपस्थित रहे। वक्ताओं ने अधिक से अधिक पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनने का आह्वान किया। शक्ति वाटिका के माध्यम से श्रद्धा और प्रकृति के बीच एक गहरा संबंध स्थापित किया जा रहा है, जो आने वाले समय में प्रेरणास्रोत बनेगा।