वाराणसी। लालपुर स्थित ट्रेड फैसिलिटी सेंटर में आयोजित हो रहे ओडिशा पर्व में रविवार को ओडिशा की उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री प्रवति परिदा पहुंचीं। उन्होंने आयोजन में ओडिशा की कला, संस्कृति, परंपरा और पर्यटन को करीब से देखा और काशी के साथ ओडिशा के सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ओडिशा पर्व के आयोजन के पीछे मूल भावना जगन्नाथ को विश्वनाथ से जोड़ने की है।

प्रवति परिदा ने कहा कि काशी और पुरी दोनों ही भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना के प्रमुख केंद्र हैं। दोनों स्थानों की अपनी विशिष्ट पहचान है, लेकिन आस्था के स्तर पर इनके बीच गहरा संबंध रहा है। इसी पुराने सांस्कृतिक जुड़ाव को वर्तमान समय में नई दिशा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ओडिशा की समृद्ध कला, संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन की विविधता को काशी के माध्यम से देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का यह महत्वपूर्ण अवसर है।

उन्होंने कहा कि काशी केवल उत्तर प्रदेश या देश का एक धार्मिक शहर नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का एक बड़ा केंद्र है। इसी तरह पुरी भगवान जगन्नाथ की आस्था का प्रमुख धाम होने के साथ ओडिशा की पहचान का भी अभिन्न हिस्सा है। दोनों क्षेत्रों के बीच धार्मिक यात्राओं, परंपराओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का लंबा इतिहास रहा है।

जगन्नाथ और विश्वनाथ के जुड़ाव पर जोर

ओडिशा की उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा पर्व का उद्देश्य केवल एक राज्य की कला और संस्कृति का प्रदर्शन करना नहीं है। इसके पीछे काशी और ओडिशा के बीच मौजूद सांस्कृतिक रिश्तों को लोगों तक पहुंचाने की भावना भी है। उन्होंने कहा कि जगन्नाथ को विश्वनाथ से जोड़ने की यह पहल दोनों क्षेत्रों के लोगों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगी।

उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ और बाबा विश्वनाथ से जुड़ी आस्थाएं देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को जोड़ती हैं। धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देकर इन संबंधों को और व्यापक बनाया जा सकता है। ओडिशा पर्व इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया है।

काशी के माध्यम से ओडिशा की पहचान को बढ़ावा

प्रवति परिदा ने कहा कि ओडिशा अपनी विशिष्ट कला, हस्तशिल्प, लोक परंपराओं, नृत्य, संगीत, खान-पान और धार्मिक विरासत के लिए जाना जाता है। राज्य में मौजूद मंदिर, समुद्र तट, प्राकृतिक स्थल और सांस्कृतिक परंपराएं देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। ओडिशा पर्व के माध्यम से इन सभी पहलुओं को काशी आने वाले लोगों के सामने रखने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वाराणसी जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक शहर में ओडिशा की विरासत को प्रदर्शित करने से राज्य के पर्यटन को नई पहचान मिल सकती है। इससे दोनों राज्यों के बीच पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सांस्कृतिक आदान-प्रदान से बढ़ेगा जुड़ाव

ओडिशा की उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है। अलग-अलग राज्यों की अपनी भाषा, परंपराएं और सांस्कृतिक पहचान होने के बावजूद उनके बीच गहरा भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से एक-दूसरे की संस्कृति को समझने और सम्मान देने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि काशी और ओडिशा के बीच पहले से मौजूद संबंधों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी जरूरी है। युवा यदि देश की विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित होंगे तो राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता की भावना और मजबूत होगी।

प्रेस कांफ्रेंस में मंत्री अनिल राजभर भी रहे मौजूद

ओडिशा पर्व के दौरान आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उत्तर प्रदेश के श्रम एवं रोजगार मंत्री अनिल राजभर भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में दोनों राज्यों के सांस्कृतिक संबंधों और पर्यटन की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस दौरान ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को काशी के मंच से व्यापक स्तर पर सामने लाने की पहल को महत्वपूर्ण बताया गया।

ओडिशा पर्व में राज्य की कला और संस्कृति से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित किया जा रहा है। यहां आने वाले लोगों को ओडिशा की पारंपरिक विरासत को करीब से जानने और समझने का अवसर मिल रहा है। आयोजन में राज्य की विशिष्ट पहचान से जुड़े विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रस्तुतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

पर्यटन को भी मिलेगा लाभ

ओडिशा सरकार की ओर से पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रवति परिदा ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को एक-दूसरे से जोड़कर पर्यटकों के लिए नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। काशी आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ओडिशा के पर्यटन स्थलों की जानकारी मिलने से राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि पुरी, कोणार्क, भुवनेश्वर सहित ओडिशा के कई प्रमुख पर्यटन स्थल अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के लिए प्रसिद्ध हैं। इन स्थलों को देश के प्रमुख धार्मिक केंद्रों से जोड़कर पर्यटन का व्यापक नेटवर्क तैयार किया जा सकता है।

कुल मिलाकर लालपुर के ट्रेड फैसिलिटी सेंटर में आयोजित ओडिशा पर्व काशी और ओडिशा के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने का मंच बन रहा है। ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवति परिदा ने इस अवसर पर जगन्नाथ और विश्वनाथ के आध्यात्मिक जुड़ाव को केंद्र में रखते हुए दोनों क्षेत्रों के पुराने संबंधों को नई ऊंचाई देने की बात कही। उनका कहना है कि काशी के माध्यम से ओडिशा की कला, संस्कृति, परंपरा और पर्यटन को देश के सामने प्रस्तुत करने से दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधों को और मजबूती मिलेगी।

 

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