बिजली कर्मियों का अलर्ट : निजीकरण से प्रदेश लौटेगा लालटेन युग

Update: 2025-06-23 04:03 GMT
Uttar Pradesh उत्तरप्रदेश : विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से राजधानी में आयोजित महापंचायत ने निर्णय लिया कि प्रदेश में बिजली कंपनियों के निजीकरण के विरोध में 9 जुलाई को देश के 27 लाख बिजलीकर्मी एक दिन की राष्ट्रव्यापी सांकेतिक हड़ताल करेंगे।
बिजलीकर्मी, रेल कर्मचारी, राज्य कर्मचारी, किसान और उपभोक्ता व्यापक आंदोलन का हिस्सा बनेंगे। इसकी तैयारी के तहत 2 जुलाई को देशभर में व्यापक विरोध किया जाएगा। समिति ने चेतावनी दी कि इसके बाद भी प्रबंधन ने फैसला नहीं बदला तो जेल भरो आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। अगले चरण में इसकी भी तिथि घोषित की जाएगी। प्रदेश में बिजली निजीकरण का फैसला पहले भी दो सरकारें वापस ले चुकी हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की है, क्योंकि विद्युत नियामक आयोग ने निजीकरण के फैसले में कई आपत्तियां निकली हैं।
इन आपत्तियों से स्पष्ट हो गया है कि निजीकरण का प्रस्ताव ही गलत है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा 2006 में उपभोक्ता परिषद की याचिका पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह की सरकार में निजीकरण के तहत सेस फ्रेंचाइजी का फैसला वापस हुआ था। यह फ्रेंचाइजी लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्र माल, मलिहाबाद, काकोरी से संबंधित था। जिस दिन उसका टेकओवर किया जा रहा था, उसी दिन विद्युत नियामक आयोग द्वारा पूरे मामले पर रोक लगा दी गई थी। ऐसे में सरकार ने फैसला वापस ले लिया।
इसी तरह वर्ष 2014 में जब पांच शहरों में बिजली के निजीकरण का मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में कैबिनेट से पास हुआ था। मगर उपभोक्ता परिषद की याचिका पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा अवमानना नोटिस जारी किए जाने के बाद उसे भी वापस कर लिया गया था। उपभोक्ता परिषद ने आगाह किया है कि यदि जबरन प्रदेश में बिजली का निजीकरण हुआ तो उसके दो नुकसान होंगे। एक तो बिजली के दाम कई गुना बढ़ जाएंगे दूसरी तरफ गांवों की बिजली व्यवस्था फिर से लालटेन युग में लौट जाएगी।
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