Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: अयोध्या राम मंदिर में कथित दान हेराफेरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। CPI केरल के सचिव बिनॉय विश्वम ने रविवार को इस मामले पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस कथित घोटाले ने RSS और BJP का “असली चेहरा” उजागर कर दिया है।
बिनॉय विश्वम ने अपने बयान में आरोप लगाया कि भगवा पार्टी ने धर्म और भगवान राम के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया है। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े दान संग्रह को एक राजनीतिक साधन के रूप में उपयोग किया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि संघ परिवार पर पहले भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि उसने राजनीतिक फायदे के लिए बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना को समर्थन दिया था। उनके अनुसार, मंदिर निर्माण और दान संग्रह की पूरी प्रक्रिया को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
CPI नेता ने कथित घोटाले का उल्लेख करते हुए दावा किया कि मंदिर से जुड़े फंड में लगभग 1,400 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने और चांदी के दान भी कथित रूप से गायब हो गए हैं।
हालांकि, इन आरोपों को लेकर अब तक किसी भी आधिकारिक जांच एजेंसी या मंदिर प्रबंधन की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
भाजपा की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जबकि पार्टी के समर्थकों का कहना है कि मंदिर से जुड़े दान और प्रबंधन पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत संचालित होते हैं।
इस विवाद के बीच धार्मिक और राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमाता नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आरोप-प्रत्यारोप आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी असर डाल सकते हैं।
अयोध्या राम मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है और इसके निर्माण व संचालन से जुड़ी गतिविधियां लगातार सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बनी रहती हैं।
फिलहाल, इस पूरे मामले में किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जो इन आरोपों की सच्चाई को स्पष्ट कर सके।