कानपुर । बाढ़ प्रभावित लोगों को एक्सपायर्ड सीरप बांटे जाने के आरोपों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। कानपुर नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) इन्द्रदेव सिंह ने इन आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए संबंधित खबर का खंडन किया है। सीएमओ के मुताबिक विभागीय जांच में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि दो सितंबर को आयोजित बाढ़ राहत कैंप में एक्सपायर्ड ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप का वितरण किया गया था।

सीएमओ ने बताया कि मामले की जांच के दौरान विभागीय रिकॉर्ड, दवाओं के स्टॉक और बाढ़ राहत के लिए तैयार किए गए स्टॉक रजिस्टर की जांच की गई। जांच में दो सितंबर को आयोजित बाढ़ राहत कैंप में उक्त सीरप के वितरण की कोई पुष्टि नहीं हुई। उन्होंने कहा कि संबंधित खबर में लगाए गए आरोप विभागीय अभिलेखों और उपलब्ध दवा स्टॉक की स्थिति से मेल नहीं खाते हैं।

बाढ़ राहत कैंप के स्टॉक रजिस्टर की जांच

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जांच के दौरान बाढ़ राहत कार्य के लिए बनाए गए स्टॉक रजिस्टर को भी देखा। इस रजिस्टर में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप की एक भी प्रविष्टि दर्ज नहीं मिली। सीएमओ के अनुसार यदि कैंप में इस दवा का वितरण हुआ होता तो उसका विवरण स्टॉक रजिस्टर में दर्ज होना चाहिए था। लेकिन रजिस्टर में इस सीरप का कोई उल्लेख नहीं मिला।

इसी आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि दो सितंबर को आयोजित बाढ़ राहत कैंप में उक्त सीरप वितरित किए जाने की बात विभागीय रिकॉर्ड से पुष्ट नहीं होती है। सीएमओ ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और स्टॉक की जांच के बाद ही विभाग की ओर से आरोपों को तथ्यहीन बताया गया है।

वर्ष 2025 में ड्रग वेयरहाउस पहुंची थी दवा

जांच के दौरान सामने आए रिकॉर्ड के मुताबिक ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप वर्ष 2025 में ड्रग वेयरहाउस कानपुर नगर में प्राप्त हुई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसे जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में भेजा गया।

विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार मार्च 2025 तक ड्रग वेयरहाउस में उपलब्ध इस सीरप का वितरण सभी संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में किया जा चुका था। यानी दवा का स्टॉक संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों को उपलब्ध करा दिया गया था।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मौजूदा समय में जिले के किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उक्त बैच की दवा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बाढ़ राहत कैंप में उसी बैच की दवा उपलब्ध होने और उसके वितरण का सवाल भी जांच के दायरे में आया। जांच में इस दवा की कैंप के स्टॉक में मौजूदगी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

रिकॉर्ड में नहीं मिली दवा की प्रविष्टि

सीएमओ इन्द्रदेव सिंह के मुताबिक जांच के दौरान बाढ़ राहत के लिए अलग से तैयार किए गए स्टॉक रजिस्टर का अवलोकन किया गया। इसमें विभिन्न दवाओं से संबंधित प्रविष्टियों की जांच की गई, लेकिन ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप की कोई एंट्री नहीं मिली।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार दवाओं के वितरण में रिकॉर्ड का विशेष महत्व होता है। किसी भी स्वास्थ्य शिविर या राहत कैंप में दवा के आने और उसके वितरण का विवरण दर्ज किया जाता है, ताकि स्टॉक का मिलान किया जा सके। इसी प्रक्रिया के तहत बाढ़ राहत कैंप के रजिस्टर की जांच की गई। रजिस्टर में उक्त सीरप का विवरण नहीं मिलने के कारण विभाग ने आरोपों को रिकॉर्ड से असत्यापित बताया है।

आरोपों के बाद स्वास्थ्य विभाग में हुई जांच

बाढ़ पीड़ितों को कथित रूप से एक्सपायर्ड सीरप बांटे जाने की खबर सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। इसमें ड्रग वेयरहाउस से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों और बाढ़ राहत कैंप के स्टॉक रजिस्टर तक की स्थिति देखी गई।

जांच के बाद सीएमओ ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध दस्तावेज आरोपों की पुष्टि नहीं करते। उन्होंने संबंधित खबर का खंडन करते हुए विभागीय रिकॉर्ड को आधार बनाया है। विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जिस सीरप की बात सामने आई है, वह वर्ष 2025 में ड्रग वेयरहाउस में प्राप्त हुई थी और मार्च 2025 तक उसका वितरण स्वास्थ्य केंद्रों में किया जा चुका था।

बाढ़ प्रभावितों के इलाज के लिए लगाए गए थे कैंप

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कैंप आयोजित किए जाते हैं। इन कैंपों में बाढ़ प्रभावित लोगों की जांच, उपचार और जरूरत के अनुसार दवाओं का वितरण किया जाता है। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता और उनके सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर किसी भी प्रकार की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना स्वाभाविक है।

हालांकि, कानपुर नगर के सीएमओ की जांच के अनुसार दो सितंबर के बाढ़ राहत कैंप में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप बांटे जाने का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। स्टॉक रजिस्टर में भी इस दवा की कोई प्रविष्टि नहीं मिली है।

सीएमओ ने जांच के आधार पर कहा है कि बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सीरप बांटे जाने के आरोप तथ्यहीन हैं। विभागीय रिकॉर्ड और दवा के मौजूदा स्टॉक की स्थिति के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित खबर का खंडन किया है। विभाग का कहना है कि उपलब्ध अभिलेखों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे दो सितंबर के बाढ़ राहत कैंप में उक्त सीरप के वितरण की पुष्टि हो सके।

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