UP उपचुनाव को लेकर बड़ा अपडेट, घोसी समेत तीन सीटों पर चुनाव आयोग का फैसला

Update: 2026-07-17 15:30 GMT

Lucknow लखनऊ :  उत्तर प्रदेश में खाली हुई तीन विधानसभा सीटों पर अब उपचुनाव नहीं कराए जाएंगे। भारत निर्वाचन आयोग ने प्रदेश की घोसी, दुद्धी और फरीदपुर विधानसभा सीटों को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए स्पष्ट किया है कि इन सीटों पर उपचुनाव कराने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। आयोग के अनुसार, विधानसभा चुनाव में अब बहुत कम समय बचा है, इसलिए इन सीटों पर उपचुनाव कराने के बजाय आगामी विधानसभा चुनाव में ही मतदान कराया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शुक्रवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब एक वर्ष से भी कम समय शेष रह गया है। ऐसे में उपचुनाव कराने का औचित्य नहीं बनता। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग समय, संसाधन और चुनावी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लेता है।

चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद अब घोसी, दुद्धी और फरीदपुर विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता सीधे आगामी विधानसभा चुनाव में ही अपने नए विधायक का चुनाव करेंगे। इन सीटों पर फिलहाल विधायकों के निधन के कारण पद रिक्त हुए थे।

मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट समाजवादी पार्टी के विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद खाली हुई थी। सुधाकर सिंह का निधन 20 नवंबर 2025 को हुआ था। इसके बाद से यह सीट रिक्त चल रही थी। वहीं, सोनभद्र की दुद्धी विधानसभा सीट भी खाली हुई थी, जिस पर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई थी।

इसके अलावा बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट भाजपा विधायक प्रो. डॉ. श्याम बिहारी लाल के निधन के बाद रिक्त हुई थी। उनका निधन इस वर्ष 2 जनवरी को हुआ था। इन तीनों सीटों पर उपचुनाव की संभावनाओं को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी, लेकिन अब चुनाव आयोग के फैसले के बाद स्थिति साफ हो गई है।

निर्वाचन आयोग का मानना है कि जब किसी राज्य में विधानसभा चुनाव का समय नजदीक होता है तो रिक्त सीटों पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता नहीं होती। इससे चुनावी प्रक्रिया को दोहराने के बजाय सीधे आम चुनाव कराना अधिक उचित माना जाता है।

आयोग के इस निर्णय का असर राजनीतिक दलों की रणनीति पर भी पड़ेगा। भाजपा, समाजवादी पार्टी और अन्य दल इन सीटों पर उपचुनाव की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार करनी होगी।

घोसी, दुद्धी और फरीदपुर सीटों पर उपचुनाव नहीं होने से इन क्षेत्रों के मतदाताओं को अब नए विधायक के लिए कुछ समय और इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर फिर से राजनीतिक मुकाबला देखने को मिलेगा।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव आयोग का यह फैसला पूरी तरह चुनावी समयसीमा और संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। आम चुनाव नजदीक होने की स्थिति में उपचुनाव कराने के बजाय विधानसभा चुनाव के साथ ही नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी करना अधिक व्यावहारिक माना जाता है।अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन तीन विधानसभा क्षेत्रों को लेकर नजर आगामी विधानसभा चुनाव पर टिक गई है। सभी प्रमुख दल इन सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए चुनावी तैयारियों में जुटेंगे।

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