Azam खां की कानूनी मुश्किलें बढ़ीं

Update: 2026-07-18 16:16 GMT

Rampur रामपुर :  समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां को शनिवार को एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए विवादित बयान से जुड़े मामले में अदालत ने उनकी अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दो साल की सजा को बरकरार रखा गया है। सुनवाई के दौरान आजम खां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से अदालत में पेश हुए।

यह मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है। उस समय आजम खां समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में थे। चुनाव प्रचार के दौरान भोट थाना क्षेत्र में आयोजित एक रोड शो में उन्होंने एक बयान दिया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इस वीडियो में आजम खां तत्कालीन जिलाधिकारी को लेकर टिप्पणी करते हुए नजर आए थे।

वायरल वीडियो में आजम खां ने कहा था, “ये तनखइया हैं, इनसे मत डरियो...”। इसके साथ ही उन्होंने तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी पर कई आरोप लगाए थे। उनके इस बयान को लेकर चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया था। दिल्ली स्थित चुनाव आयोग ने इस मामले में राज्य निर्वाचन आयोग से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी से मामले की जानकारी लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी एवं वर्तमान में मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर आन्जनेय कुमार सिंह के आदेश पर कार्रवाई शुरू हुई। तत्कालीन एसडीएम टांडा और चमरौआ विधानसभा क्षेत्र के सहायक निर्वाचन अधिकारी (एआरओ) घनश्याम त्रिपाठी की ओर से भोट थाने में आजम खां के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।

पुलिस जांच के बाद मामले में चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई। इसके बाद निचली अदालत में सुनवाई चली। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आजम खां को दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आजम खां ने एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी।

शनिवार को एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया। अदालत ने आजम खां की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही माना और उनकी दो साल की सजा को बरकरार रखा।

अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं और समर्थकों की नजर अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। वहीं, मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के फैसले को कानून के अनुसार बताया है।

आजम खां के लिए यह फैसला एक और कानूनी चुनौती के रूप में सामने आया है। इससे पहले भी वह कई मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर चुके हैं। लंबे समय से चल रहे इस मामले में अदालत के फैसले के बाद अब आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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