उत्तर प्रदेश

Omaxe आर-2 बना साइबर ठगी का अड्डा, पुलिस ने गिरोह पर कसा शिकंजा

Ratna Netam
17 July 2026 8:45 PM IST
Omaxe आर-2 बना साइबर ठगी का अड्डा, पुलिस ने गिरोह पर कसा शिकंजा
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Lucknow लखनऊ : राजधानी लखनऊ में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। शहीद पथ किनारे गोमतीनगर विस्तार स्थित पॉश आवासीय सोसायटी ‘ओमेक्स आर-2’ में क्राइम ब्रांच, साइबर क्राइम और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया, जो विदेशों में बैठे लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था।

पुलिस के अनुसार, साइबर ठगों ने सोसायटी के चार फ्लैटों को अपना ठिकाना बना रखा था। इन फ्लैटों से ही पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। यहां से ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, डेटा शीट और बैंक से जुड़े कई दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस ने इस ठिकाने को ‘मिनी जामताड़ा’ के रूप में संचालित साइबर अपराध का केंद्र बताया है।

एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि गिरोह पिछले करीब आठ महीनों से सक्रिय था और मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को अपना निशाना बना रहा था। आरोपी डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों को डराते थे और उन्हें फर्जी जांच एजेंसियों के नाम पर मानसिक दबाव में लेकर रुपये ऐंठते थे।

जांच में सामने आया है कि साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर विदेशी नागरिकों से बड़ी रकम वसूली। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने पिछले आठ महीनों में करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया है। हालांकि पुलिस अभी पूरे नेटवर्क और ठगी की वास्तविक रकम की जांच कर रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों की मदद से विदेशों में बैठे लोगों का डेटा हासिल करते थे। इसके बाद उन्हें फोन कॉल, वीडियो कॉल और अन्य डिजिटल माध्यमों से संपर्क कर डराया जाता था। ठग खुद को सरकारी एजेंसी, पुलिस या जांच अधिकारी बताकर पीड़ितों को फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी देते थे।

छापेमारी के दौरान पुलिस टीम को कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इनमें बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, डेटा रिकॉर्ड और बैंक से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं। पुलिस इन सभी की जांच कर रही है, ताकि गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का पता लगाया जा सके।

गौरतलब है कि लखनऊ में साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस की यह लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले भी 1 जुलाई को समिट बिल्डिंग से 119 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे गिरोहों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह का नेटवर्क किन-किन देशों तक फैला हुआ था और ठगी की रकम किन खातों में भेजी जाती थी। इसके अलावा गिरोह के सरगना और अन्य सहयोगियों की तलाश भी की जा रही है।

अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या ऑनलाइन धमकी से डरें नहीं। कोई भी सरकारी एजेंसी डिजिटल अरेस्ट के नाम पर पैसे की मांग नहीं करती है। साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन को सूचना देने की अपील की गई है।लखनऊ पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में ऐसे और गिरोहों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।

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