श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत! राम मंदिर में बिना पास दर्शन की व्यवस्था लागू
अयोध्या : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत देने वाला फैसला लागू कर दिया गया है। अब रामलला के सामान्य दर्शन के लिए किसी प्रकार के पास की आवश्यकता नहीं होगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने ट्रायल के तौर पर शुरू की गई इस व्यवस्था को सफल मानते हुए इसे स्थायी रूप से लागू करने का निर्णय लिया है। ट्रस्ट का कहना है कि नई व्यवस्था से श्रद्धालुओं को अधिक सुविधा मिली है, मंदिर परिसर में भीड़ का दबाव कम हुआ है और सुरक्षा व्यवस्था भी पहले की तुलना में अधिक सुचारु हो गई है।
दरअसल, यह व्यवस्था स्कूलों की ग्रीष्मकालीन छुट्टियां समाप्त होने के बाद परीक्षण के तौर पर शुरू की गई थी। पूरे जुलाई महीने तक इस प्रणाली का संचालन किया गया और इस दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था या सुरक्षा संबंधी समस्या सामने नहीं आई। ट्रस्ट के अनुसार नई व्यवस्था ने अपेक्षा से बेहतर परिणाम दिए हैं। श्रद्धालु बिना किसी अतिरिक्त औपचारिकता के सहज रूप से मंदिर में प्रवेश कर दर्शन कर पा रहे हैं, जिससे उनकी यात्रा अधिक सरल और सुगम हो गई है।
राम मंदिर ट्रस्ट के पास व्यवस्था प्रभारी नरेंद्र ने बताया कि सामान्य दर्शन पास की व्यवस्था अब पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। अब श्रद्धालु बिना पास के रामलला के दर्शन करने के साथ-साथ मंदिर की प्रथम मंजिल पर स्थापित राम परिवार के दर्शन भी कर सकेंगे। इसके अलावा परकोटे में स्थित सभी छह उप मंदिरों में भी श्रद्धालुओं को बिना किसी रोक-टोक के दर्शन की सुविधा मिल रही है।
उन्होंने बताया कि दर्शन के बाद श्रद्धालु शेषावतार मंदिर, सप्त मंडपम तथा कुबेर नवरत्न टीला सहित मंदिर परिसर के अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर भी आसानी से जा सकते हैं। पहले इन स्थानों तक पहुंचने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाओं का पालन करना पड़ता था, लेकिन अब श्रद्धालु पूरे परिसर का सहज रूप से भ्रमण कर रहे हैं। इससे न केवल दर्शन व्यवस्था सरल हुई है, बल्कि श्रद्धालुओं का धार्मिक अनुभव भी अधिक संतोषजनक बन गया है।
ट्रस्ट का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद मंदिर परिसर में भीड़ का दबाव अलग-अलग हिस्सों में संतुलित हो गया है। पहले अधिकांश श्रद्धालु एक ही दिशा में एकत्र हो जाते थे, जिससे सुरक्षा कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। अब श्रद्धालु पूरे परिसर में व्यवस्थित रूप से फैल जाते हैं, जिससे भीड़ नियंत्रण आसान हो गया है और सुरक्षा व्यवस्था भी अधिक प्रभावी हो गई है।
हालांकि ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में त्योहारों या विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बहुत अधिक बढ़ती है, तो व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की जा सकती है। फिलहाल मौजूदा व्यवस्था को सफल मानते हुए आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
इसी के साथ ट्रस्ट ने सुगम दर्शन व्यवस्था को लेकर भी कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान तय किए हैं। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया गया है कि दो-दो घंटे के प्रत्येक स्लॉट में अधिकतम 1,500 श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन की सुविधा दी जाएगी। इससे मंदिर के भीतर भीड़ नियंत्रित रहेगी और श्रद्धालुओं को आराम से दर्शन का अवसर मिलेगा।
विशिष्ट दर्शन पास की संख्या में भी कमी की गई है। अब प्रत्येक स्लॉट में केवल 50 विशिष्ट दर्शन पास जारी किए जाएंगे। ट्रस्ट का मानना है कि इससे आम श्रद्धालुओं को अधिक अवसर मिलेगा और दर्शन प्रक्रिया अधिक संतुलित रहेगी।
दिव्यांग, शारीरिक रूप से अशक्त तथा वरिष्ठ नागरिक श्रद्धालुओं के लिए पहले की तरह विशेष सुविधाएं जारी रहेंगी। मंदिर परिसर में उनके लिए व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जा रही है और उनके साथ आने वाले एक अटेंडेंट को भी ट्रस्ट की ओर से निःशुल्क प्रवेश सुविधा प्रदान की जाती है। इससे ऐसे श्रद्धालुओं को दर्शन करने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो।
हालांकि ट्रस्ट ने यह भी स्वीकार किया है कि व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले श्रद्धालुओं को अभी भी एक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। मंदिर परिसर में तीन लिफ्ट मौजूद हैं, लेकिन वर्तमान में उनका उपयोग मुख्य रूप से वीवीआईपी आगंतुकों के लिए आरक्षित है। इसके कारण व्हीलचेयर से आने वाले श्रद्धालु प्रथम मंजिल पर स्थित राम परिवार के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। ट्रस्ट इस विषय पर भी भविष्य में समाधान तलाशने की दिशा में विचार कर रहा है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालुओं में भी संतोष देखा जा रहा है। अब उन्हें लंबी औपचारिकताओं, पास बनवाने या अतिरिक्त प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ रहा है। ट्रस्ट का मानना है कि इस बदलाव से राम मंदिर में दर्शन व्यवस्था और अधिक सरल, व्यवस्थित तथा श्रद्धालु-अनुकूल बन गई है, जिससे देश-विदेश से आने वाले भक्तों को बेहतर धार्मिक अनुभव मिल सकेगा।