आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव में मतदान के दौरान हुई लापरवाही और अव्यवस्थाओं को निर्वाचन आयोग ने गंभीरता से लिया है। 23 अक्टूबर को तीन मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था में चूक और मतपत्रों के अस्त-व्यस्त होने के मामले में अब बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। आगरा खंड के रिटर्निंग अधिकारी एवं मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप ने छह निलंबित अधिकारियों सहित कुल 27 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर निर्वाचन आयोग को भेजे हैं। आयोग ने भी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। इस घटनाक्रम के बाद चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी को लेकर प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 23 अक्टूबर को मतदान कराया गया था। इस निर्वाचन क्षेत्र में आगरा, मथुरा सहित कुल 12 जिले शामिल हैं। पूरे निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 150 मतदान केंद्र बनाए गए थे और करीब 50 हजार मतदाता पंजीकृत थे। मतदान सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक हुआ था। आगरा जिले में कुल 24 मतदान केंद्रों पर मतदान कराया गया था।

मतदान के दौरान फतेहाबाद ब्लॉक के बूथ नंबर 26 और सैंया ब्लॉक के बूथ नंबर 21 पर हंगामे और मतदान प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायत सामने आई थी। इन दोनों बूथों पर मतपत्रों के अस्त-व्यस्त होने और मतदान की गोपनीयता प्रभावित होने के आरोप लगे थे। संबंधित बूथों के कुछ बैलेट पेपर सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हुए थे। इसके बाद चुनाव की निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे।

सपा प्रत्याशी की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

इस मामले में समाजवादी पार्टी के शिक्षक एमएलसी प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल ने निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी और बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे।

शिकायत मिलने के बाद निर्वाचन आयोग ने आगरा खंड के रिटर्निंग अधिकारी एवं मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप से पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी थी। मंडलायुक्त ने मामले की जांच कर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका का परीक्षण किया। उनकी रिपोर्ट के आधार पर निर्वाचन आयोग ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

छह अधिकारी पहले ही हो चुके हैं निलंबित

निर्वाचन आयोग की कार्रवाई में छह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था। इनमें फतेहाबाद और सैंया ब्लॉक के सेक्टर मजिस्ट्रेट, सेक्टर पुलिस अधिकारी और उपनिरीक्षक शामिल हैं।

निलंबित अधिकारियों में फतेहाबाद बूथ नंबर 26 से जुड़े सेक्टर मजिस्ट्रेट एवं प्रभागीय वनाधिकारी विशाल राठौर, सेक्टर पुलिस अधिकारी एवं अपर निरीक्षक पुरुषोत्तम पाल और एकता थाने के उपनिरीक्षक सुमित त्यागी शामिल हैं।

वहीं सैंया बूथ नंबर 21 से जुड़े सेक्टर मजिस्ट्रेट एवं जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी ओपी चक, सेक्टर पुलिस अधिकारी एवं क्राइम ब्रांच निरीक्षक हरिशरण सिंह और एत्माद्दौला थाने के उपनिरीक्षक संदीप कुमार को भी निलंबित किया गया है।

आयोग ने इन अधिकारियों के खिलाफ मतदान केंद्रों पर प्रभावी निगरानी नहीं रखने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में गंभीर लापरवाही बरतने के आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

पीठासीन अधिकारियों और 16 पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई

मामले में केवल छह निलंबित अधिकारियों तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही। दोनों विवादित मतदान केंद्रों पर तैनात पीठासीन अधिकारियों, मतदान कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है।

प्रशासन की ओर से कुल 21 अन्य कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। इनमें दो पीठासीन अधिकारी, तीन मतदान अधिकारी और 16 पुलिसकर्मी शामिल हैं। पुलिसकर्मियों में पांच मुख्य आरक्षी और 11 आरक्षी बताए गए हैं।

इस तरह छह निलंबित अधिकारियों और 21 अन्य कर्मचारियों को मिलाकर कुल 27 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप की ओर से संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर आयोग को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। आरोप पत्रों की औपचारिक निर्गमन प्रक्रिया आयोग के निर्देशों और संबंधित विभागीय प्रक्रियाओं के अनुसार पूरी की जाएगी।

तीन बूथों पर कराया गया था पुनर्मतदान

23 अक्टूबर को हुई मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद निर्वाचन आयोग ने तीन मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराने का निर्णय लिया था। इनमें फतेहाबाद ब्लॉक का बूथ नंबर 26, सैंया ब्लॉक का बूथ नंबर 21 और खेरागढ़ तहसील का बूथ नंबर 20 शामिल था।

तीनों मतदान केंद्रों पर 26 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक दोबारा मतदान कराया गया। इस दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और मतदान प्रक्रिया की निगरानी बढ़ाई गई।

हालांकि, अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश मुख्य रूप से फतेहाबाद और सैंया के बूथ नंबर 26 और 21 से संबंधित रहे। खेरागढ़ के बूथ नंबर 20 पर पुनर्मतदान कराया गया था, लेकिन वहां के अधिकारियों के खिलाफ इसी कार्रवाई के तहत कोई निलंबन आदेश सामने नहीं आया।

आयोग ने मांगी जवाबदेही

निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था में सामने आई कमियों को गंभीरता से लिया है। आयोग का जोर इस बात पर है कि मतदान केंद्रों पर तैनात प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट हो और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

मतपत्रों की सुरक्षा और मतदान की गोपनीयता चुनाव प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ऐसे में किसी मतदान केंद्र पर बैलेट पेपर का अस्त-व्यस्त होना या उनकी गोपनीयता प्रभावित होने की शिकायत सामने आना गंभीर विषय माना जाता है।

फिलहाल आगरा खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव में हुई लापरवाही के मामले में छह अधिकारियों के निलंबन के बाद अब कुल 27 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। विभागीय जांच और आयोग के निर्देशों के बाद संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होगी। इस कार्रवाई से चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश मिला है कि मतदान प्रक्रिया में लापरवाही बरतने पर जवाबदेही तय की जाएगी।

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