जनता से रिश्ता वेबडेस्क। आगरा. रविवार को पुरे देश में ईद-उल-अज़हा की नमाज़ अदा की गई. आगरा की लगभग 450 मस्जिदों में से 250 में नमाज-ए-ईद-उल-अज़हा अदा की गई. इसमें सबसे ज्यादा खास वो चार मस्जिदें रहीं जिनमें मुस्लिम ख्वातीनों ने भी नमाज़ अदा की. इन मस्जिदों में औरतों के लिए एक खास पर्दे का इंतजाम किया गया. जहां पर उन्होंने नमाज़ अदा की. नमाज़ अदा करने के बाद सभी ने एक दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी.

दिनभर चलता रहा दावतों का दौर
फिज़र की नमाज़ के बाद सुबह 5 बजकर 55 मिनट से लेकर 9 बजकर 30 मिनट तक अलग—अलग मस्जिदों में ईद—उल—अज़हा की नमाज़ अदा की गई. नमाज़ के बाद लोगों ने कुर्बानी की. फिर सुबह से लेकर शाम तक घरों मे दस्तरख्वान सजाए गए. लोगों ने शीर के साथ कबाब, स्टू, सींक कबाब, मुल्ला दो प्याज़े, बटर मटन और बिरियानी का जायज़ा चखा.
इन मस्जिदों में अदा की गई नमाज़
आपको बतादें कि, सैफी नगर जगदीशपुरा की मस्जिद इब्राहीमी, लोहामण्ड़ी की मस्जिद अबू बकर, राजामंड़ी की मस्जिद रफीउज्जजमा और सिकंदरा की मस्जिद हुदा—शमसी कालॉली में नमाज़ अदा की गई.
तरावीह भी पढ़ती हैं ख्वातीन
मंटोला के ढोलीखार में मुकद्दस रमजान में इलाके की ख्वातीनों के लिए तरावीह पढ़ने का इंतजाम कराया जाता है. यहां तरावीह पढ़ाने वाले हाफिज़ का जिम्मा भी एक आलिमा संभालती हैं, जो हाफिज—ए—कुरआन भी होती हैं. ढोलीखार स्थित सलाहउद्दीन की इमारत में रमजान में तरावीह पढ़ने का इंतजाम किया जाता है. इस्लामिक पीस एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद इकबाल ने बताया कि, औरतें भी मस्जिद में जाकर नमाज़ अदा कर सकती हैं. बशर्ते पूरे पर्दे के साथ. आगरा की पांच मस्जदों में औरतों के लिए अलग इंतजाम किया जाता है.
इस्लाम की तालीम से भी कराया जाता है रूबरू
हाजी मोहम्मद इकबाल ने बताया कि, औरतों को रमजान की फजीलत, रोजा और इस्लाम में महिलाओं के हुकूक के बारे में भी तफ्सील से बताया जाता है. इस दौरान इस जगह पर मर्दों को एट्री नहीं मिलती. मुस्लिम विकास परिषद के अध्यक्ष समी आगाई बताते हैं कि, आमतौर पर महिलाएं अपने घरों में ही नमाज़ और कुरान पढ़तीं हैं, लेकिन शहर की इन चार—पांच मस्जिदों में ख्वातीन नमाज़ अदा करतीं हैं.


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