मुजफ्फरनगर/प्रयागराज। मुजफ्फरनगर जिले के तितावी थाना क्षेत्र स्थित बघरा की प्रसिद्ध दरगाह आलिया बाबुल हवाइज में कथित तोड़फोड़, मारपीट और कब्जे के प्रयास का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। स्थानीय पुलिस पर शिकायत के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं करने का आरोप लगाते हुए दरगाह की प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष सरताज अली और सचिव आस मोहम्मद ने आपराधिक विविध रिट याचिका दायर की है। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को प्रस्तावित बताई गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सैयद जफर अब्बास रिजवी ने अदालत में पक्ष रखा है। याचिका में मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और तितावी थानाध्यक्ष को शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग भी की गई है।
याचिका में बताया गया है कि कथित घटना 28 जून 2026 की है। आरोप है कि दरगाह के पूर्व सचिव इमरान अली अपने सहयोगियों आरिफ अब्बास, बाबर अली, रिजवान जाफर, रियासत अली और मुजम्मिल के साथ परिसर में दाखिल हुए। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक आरोपियों ने दरगाह में लगे धार्मिक पोस्टर और बैनर फाड़ दिए तथा सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को नुकसान पहुंचाया।
कमेटी का आरोप है कि जब वर्तमान प्रबंध समिति के पदाधिकारियों ने इसका विरोध किया तो उनके साथ गाली-गलौज और लाठी-डंडों से मारपीट की गई। उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। ये सभी आरोप याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से लगाए गए हैं और अदालत अथवा जांच एजेंसी द्वारा अभी इनकी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि कथित तोड़फोड़ और विवाद की गतिविधियां परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में दर्ज हुई हैं। घटना के दिन ही तितावी थाने में लिखित शिकायत देकर नामजद प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी। आरोप है कि कई सप्ताह बीतने के बाद भी स्थानीय पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई की।
याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि नामजद लोग अपने कथित राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर दरगाह परिसर और उसके प्रशासनिक कार्यों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं। कमेटी ने आशंका जताई है कि विवाद के कारण उसके पदाधिकारियों और उनके परिजनों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इस आधार पर अदालत से पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
अध्यक्ष सरताज अली और पंजीकृत कमेटी का दावा है कि उन्हें दरगाह के प्रशासनिक कार्यों को करने से रोका जा रहा है। पूर्व सचिव और उनके भाई पर अलग कमेटी गठित कर दरगाह कार्यालय पर कथित रूप से कब्जा करने का आरोप लगाया गया है। सरताज अली के अनुसार, पंजीकृत कमेटी ने अपने वैधानिक दस्तावेज और पंजीकरण प्रमाणपत्र स्थानीय पुलिस तथा वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दिए हैं।
दरगाह परिसर में 20 अगस्त को जियारत-ए-अमारी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। इससे दो दिन पहले हाईकोर्ट में सुनवाई होने के कारण अदालत के आगामी निर्देशों पर दोनों पक्षों के साथ स्थानीय प्रशासन की नजर टिकी हुई है। धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था का विषय भी महत्वपूर्ण हो गया है।
कमेटी ने प्रशासन से कार्यक्रम से पहले विवाद का समाधान कराने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी अप्रिय घटना को रोकने की मांग की है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन के आधिकारिक पक्ष का इंतजार है। हाईकोर्ट के आगामी आदेश के बाद एफआईआर, जांच और सुरक्षा संबंधी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।