Ayodhya : राम मंदिर चंदा गड़बड़ी मामले में संजय सिंह ने SIT को दस्तावेज सौंपे
Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे में कथित गड़बड़ी की जांच के मामले ने एक बार फिर राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने गुरुवार को इस मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे।
संजय सिंह ने दावा किया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जमीन की खरीद-फरोख्त में कथित तौर पर करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट से जुड़ी जमीन डील्स में अनियमितताओं के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जिन्हें उन्होंने SIT के समक्ष प्रस्तुत किया है।
सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट भी साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने सभी उपलब्ध दस्तावेज जांच एजेंसी को सौंप दिए हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “मैंने सभी दस्तावेज SIT को सौंप दिए हैं। आगे क्या कार्रवाई होगी, यह तो बस भगवान राम ही जानते हैं।”
इस बयान के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है और राजनीतिक हलकों में इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। संजय सिंह के आरोपों के बाद जांच की दिशा और प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
SIT द्वारा पहले से ही इस मामले की जांच की जा रही है, जिसमें राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी जमीन खरीद-बिक्री में कथित वित्तीय अनियमितताओं की पड़ताल शामिल है। जांच एजेंसी इस बात की समीक्षा कर रही है कि कहीं जमीन सौदों में कीमतों और लेन-देन को लेकर कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई है।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि जिन जमीनों को लेकर लेन-देन हुआ है, उनमें बाजार मूल्य और खरीद मूल्य में बड़ा अंतर है, जिससे संदेह पैदा होता है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि जनता की आस्था से जुड़े संसाधनों के दुरुपयोग का भी है।
वहीं दूसरी ओर, ट्रस्ट से जुड़े पक्षों ने पहले इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी जमीन खरीद कानूनी प्रक्रिया के तहत और पारदर्शी तरीके से की गई है। उनका कहना है कि राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कुछ नेताओं का कहना है कि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाना चाहिए, जबकि कुछ इसे राजनीतिक एजेंडे से जोड़कर देख रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे गंभीर जांच का विषय मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक विवाद करार दे रहे हैं।
फिलहाल, SIT द्वारा सौंपे गए नए दस्तावेजों की समीक्षा की जाएगी और उसके आधार पर आगे की जांच प्रक्रिया तय की जाएगी। जांच एजेंसी ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
इस पूरे मामले के चलते अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं, और आने वाले दिनों में जांच की दिशा इस राजनीतिक और संवेदनशील मुद्दे पर और स्पष्टता ला सकती है।