अयोध्या राम मंदिर में प्रायश्चित अनुष्ठान, नई ऊर्जा का प्रयास

Update: 2026-07-17 14:22 GMT

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर: चढ़ावा और दान से जुड़ी कथित चोरी के मामले के बाद अब मंदिर की पवित्रता और गरिमा को बहाल करने के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान शुरू किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से मंदिर परिसर और विभिन्न गुरुकुलों में 10 दिवसीय प्रायश्चित और शुद्धि अनुष्ठान कराया जा रहा है। इस दौरान भगवान विष्णु के सहस्रनाम का पाठ कर वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और नई स्फूर्ति का संचार करने का प्रयास किया जा रहा है।

श्रीराम लला मंदिर में इस विशेष अनुष्ठान के तहत मंदिर के पुजारी और आचार्य नियमित रूप से विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का सामूहिक पाठ कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि मंदिर के 18 पुजारी और पांच आचार्य दिन में दो बार इस पाठ में शामिल हो रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार विष्णु सहस्रनाम के जाप से सकारात्मकता, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

इस अनुष्ठान के माध्यम से ट्रस्ट की ओर से उन त्रुटियों के लिए भी क्षमा प्रार्थना की जा रही है, जो मंदिर की व्यवस्था संभालने वालों से जाने-अनजाने हुई हों। ट्रस्ट का उद्देश्य यह संदेश देना है कि वह मंदिर की व्यवस्था और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह जवाबदेह है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी की पहल पर बुधवार से यह शुद्धि अनुष्ठान शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि दान और चढ़ावे से जुड़ी घटना के बाद मंदिर की पवित्रता और गरिमा को बनाए रखने के लिए यह विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि अनुष्ठान का उद्देश्य भगवान से प्रार्थना करना और मंदिर के वातावरण में फिर से सकारात्मकता स्थापित करना है।

दस दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में विष्णु सहस्रनाम का बड़ी संख्या में पाठ किया जाएगा। ट्रस्ट के अनुसार प्रतिदिन कम से कम 251 बार विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र के पाठ का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मंदिर परिसर और गुरुकुलों में भी धार्मिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

रामकथा साहित्य के जानकार और वशिष्ठ भवन पीठाधीश्वर डॉ. राघवेशदास ने बताया कि विष्णु सहस्रनाम में भगवान श्रीराम के नाम का भी उल्लेख मिलता है। सहस्रनाम में राम नाम का विशेष महत्व बताया गया है। उनका कहना है कि राम जन्मभूमि जैसे पवित्र स्थान पर इन नामों का लगातार पाठ करने से आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है और भक्तों के मन में उत्पन्न निराशा दूर होती है।

ट्रस्ट के सदस्य दिनेन्द्र दास ने बताया कि रामलला के स्थान पर हुई गलतियों के प्रायश्चित के लिए विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र के साथ-साथ वाल्मीकि रामायण का पाठ भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान का उद्देश्य मंदिर की व्यवस्था में हुई भूलों के लिए भगवान से क्षमा मांगना और वातावरण को सकारात्मक बनाना है।

गौरतलब है कि राम मंदिर में चढ़ावे और दान की गड़बड़ी के आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया था। शुरुआती जांच के आधार पर मंदिर में दान की गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी इस पूरे मामले में वित्तीय लेनदेन और अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

इस विवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे की भी खबर सामने आई थी। हालांकि ट्रस्ट की ओर से लगातार कहा गया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

चढ़ावा चोरी की घटना से कई श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई थीं। इसी को देखते हुए ट्रस्ट ने धार्मिक अनुष्ठान के जरिए मंदिर के वातावरण में विश्वास और श्रद्धा को मजबूत करने की पहल की है। अब सभी की नजरें एसआईटी जांच की रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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