संभल: बहुचर्चित हरिहर मंदिर-जामा मस्जिद विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई, लेकिन इस बार भी कोई समाधान नहीं निकल सका। करीब 45 मिनट तक चली वार्ता में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी मांगें और दलीलें रखीं, लेकिन पूजा के अधिकार को लेकर सहमति नहीं बन पाई।
सोमवार को एडीजे (पाक्सो कोर्ट) अवधेश कुमार यादव की अध्यक्षता में गठित कमेटी के सामने दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इस बैठक का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार आपसी सहमति से विवाद का समाधान निकालने का प्रयास करना था। हालांकि, बातचीत के दौरान दोनों पक्ष अपने पुराने रुख पर कायम रहे।
हिंदू पक्ष ने बैठक में मांग रखी कि उन्हें विवादित स्थल पर पूजा करने का अधिकार दिया जाए। उनका कहना था कि वे केवल धार्मिक गतिविधियों की अनुमति चाहते हैं। वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस मांग का विरोध किया और कहा कि यह मामला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और संबंधित पक्षों के बीच का है। इसलिए पूजा की अनुमति देने का सवाल उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
बैठक में मौजूद जामा मस्जिद कमेटी के पदाधिकारियों ने कहा कि मामला पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है और इस पर अंतिम फैसला अदालत को ही करना है। मुस्लिम पक्ष का कहना था कि संबंधित स्थान एएसआई के अधिकार क्षेत्र में है और इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
वहीं हिंदू पक्ष के अधिवक्ता और प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उनका दावा है कि यह स्थान श्री हरिहर मंदिर से जुड़ा हुआ है और वे पूजा तथा सामूहिक जलाभिषेक का अधिकार चाहते हैं। दोनों पक्षों के बीच इसी मुद्दे को लेकर सहमति नहीं बन सकी।
गौरतलब है कि 19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से चंदौसी सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि संभल की शाही जामा मस्जिद वास्तव में श्री हरिहर मंदिर है। इसके बाद अदालत ने परिसर के सर्वे का आदेश दिया था।
अदालत के आदेश के बाद 19 नवंबर 2024 को मस्जिद परिसर में सर्वे का पहला चरण पूरा किया गया था, जबकि दूसरा चरण 24 नवंबर को हुआ था। सर्वे के दौरान इलाके में तनाव बढ़ गया था और विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। भीड़ और पुलिस के बीच झड़प हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया था।
हिंसा के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया था। मामले में तीन हत्यारोपितों, तीन महिलाओं और जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली समेत कुल 103 लोगों को जेल भेजा गया था।
इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट का रुख किया और फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि दोनों पक्षों को बैठाकर आपसी सहमति के आधार पर विवाद सुलझाने की कोशिश की जाए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहले भी दोनों पक्षों को बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन उस समय दोनों पक्ष उपस्थित नहीं हुए थे। इसके बाद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा प्रयास करने का निर्देश दिया, जिसके बाद सोमवार को फिर बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में कमेटी के अध्यक्ष एडीजे अवधेश कुमार यादव, एसीजीएम संभल नावेद अख्तर, मध्यस्थता कमेटी के सदस्य लवमोहन वार्ष्णेय, वादी पक्ष के अधिवक्ता श्रीगोपाल शर्मा, एएसआई के प्रतिनिधि विष्णु शर्मा और मस्जिद कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।
बैठक के बाद दोनों पक्षों ने माना कि बातचीत हुई, लेकिन कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका। अब आगे की प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। इस विवाद में सभी की नजर अब अदालत की अगली सुनवाई और भविष्य की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई है।