उत्तर प्रदेश : गोरखपुर जिला कारागार में बंदी की खुदकुशी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब इस मामले में निलंबित जेलर ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि बंदी शौकत अफरोज उर्फ राजू को आत्महत्या से पहले जेल के एक अधिकारी ने प्रताड़ित किया था। सस्पेंड जेलर का कहना है कि बंदी को डिप्टी जेलर ने कार्यालय में बुलाकर कथित तौर पर टॉर्चर किया था और उसके साथ गाली-गलौज भी की गई थी।
गोरखपुर जिला जेल में बंद शौकत अफरोज उर्फ राजू ने 17 जुलाई को कथित रूप से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। वह चोरी के एक मामले में न्यायिक हिरासत में बंद था। घटना के बाद जेल प्रशासन पर सवाल उठने लगे थे कि आखिर किन परिस्थितियों में एक बंदी ने जेल के अंदर इतना बड़ा कदम उठा लिया। पुलिस और जेल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की जा रही थी, लेकिन अब निलंबित जेलर के आरोपों ने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।
निलंबित जेलर ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आत्महत्या से कुछ समय पहले बंदी को डिप्टी जेलर ने चक्र कार्यालय में बुलाया था। वहां उसके साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। जेलर का दावा है कि बंदी के साथ अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल हुआ और उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
जेलर ने सवाल उठाया है कि बंदी की मौत से पहले उसकी किन-किन अधिकारियों से मुलाकात हुई थी और उस दौरान क्या बातचीत हुई, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि जेल में मौजूद अधिकारियों और उन बंदियों के बयान भी दर्ज किए जाएं, जिन्हें घटना से पहले की गतिविधियों की जानकारी हो सकती है।
शौकत अफरोज उर्फ राजू कुशीनगर का रहने वाला था। पुलिस के अनुसार, उसे चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया था, जिसके बाद उसे गोरखपुर जिला जेल भेजा गया था। जेल में रहने के दौरान उसने बैरक के अंदर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया था और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की थी।
इस मामले में जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पहले से ही सवालों के घेरे में थी। अब निलंबित जेलर के आरोप सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ सकता है। अधिकारियों के व्यवहार, बंदियों के साथ होने वाले बर्ताव और जेल की आंतरिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
वहीं, जेल अधिकारियों का पक्ष है कि मामले की जांच अलग-अलग स्तर पर चल रही है। डीआईजी जेल शैलेन्द्र महात्रे ने कहा कि घटना के समय जेलर मौजूद थे और उन्हें अपना पक्ष जांच के उचित मंच पर रखना चाहिए। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है।
निलंबित जेलर ने सिर्फ बंदी खुदकुशी मामले को लेकर ही नहीं, बल्कि जेल में हुई अन्य घटनाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने डिप्टी जेलर की भूमिका पर जांच की मांग की है और कहा है कि जेल के अन्य कर्मचारियों और बंदियों से पूछताछ के बाद स्थिति साफ हो सकती है।
गौरतलब है कि गोरखपुर जिला जेल इससे पहले भी सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर चर्चा में रह चुकी है। हाल ही में जेल से एक बंदी के फरार होने के मामले में भी जेलर समेत कई कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई थी।
फिलहाल बंदी शौकत अफरोज की मौत का मामला जांच के अधीन है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में निलंबित जेलर के आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जेल प्रशासन के संबंधित अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।