चंपत राय को 200 किलो चांदी देने का आरोप, नहीं मिली रसीद

Update: 2026-06-24 14:41 GMT

उत्तर प्रदेश: अयोध्या में राम मंदिर को लेकर चढ़ावे से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें एक कारोबारी ने बड़ा दावा किया है। कैसल ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. राजू वी. मनवानी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने वर्ष 2021 में चंपत राय को 200 किलो चांदी दान की थी, लेकिन उन्हें इसकी कोई रसीद नहीं दी गई। इस मामले के सामने आने के बाद दान की गई चांदी के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

डॉ. मनवानी के अनुसार, 26 जनवरी 2021 को उन्होंने सिंधी समुदाय की ओर से राम मंदिर निर्माण के लिए एक-एक किलो वजन की 200 चांदी की ईंटें सौंपी थीं। उनका कहना है कि उस समय उन्हें आश्वासन दिया गया था कि चांदी का उपयोग पहले जांच के बाद तय किया जाएगा। लेकिन अब तक इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है कि दान की गई चांदी का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया।

उन्होंने कहा कि हाल में चढ़ावे और दान से जुड़ी अनियमितताओं की खबरें सामने आने के बाद उनकी चिंता बढ़ गई है। उन्हें आशंका है कि कहीं उनकी दी गई चांदी का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय कहीं और तो नहीं किया गया। इसी कारण उन्होंने अब इस मामले में रसीद और उपयोग की जानकारी मांगी है।

कारोबारी ने यह भी कहा कि यदि दान की गई चांदी का इस्तेमाल मंदिर निर्माण में नहीं हुआ है, तो यह बेहद गंभीर बात है। उनका मानना है कि ऐसे मामलों से भविष्य में दान देने वालों का विश्वास प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता बहुत जरूरी है ताकि लोगों का भरोसा बना रहे।

डॉ. राजू ने बताया कि उस समय 200 किलो चांदी की कीमत लगभग 1.5 से 2 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 6 से 7 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि दान देने वाले व्यक्ति को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसका योगदान कहां और कैसे इस्तेमाल हुआ।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि मामले की जांच के लिए किसी भी स्तर पर जांच समिति या एसआईटी गठित की जाती है, तो इसमें निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिन लोगों ने अधिकारों का दुरुपयोग किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद एक बार फिर राम मंदिर से जुड़े दान और उसकी पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई है।

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