अलीगढ़। रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में स्वदेशीकरण, नवाचार और निर्यात को बढ़ावा देने के साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को मजबूत करने की दिशा में अलीगढ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अलीगढ़ नोड में तीन कंपनियां रक्षा एवं एयरोस्पेस से जुड़े उत्पादों का निर्माण शुरू करने की तैयारी में हैं। वहीं दो कंपनियां पहले से रक्षा उपकरणों के कलपुर्जे तैयार कर रही हैं। इन गतिविधियों के चलते अलीगढ़ के रक्षा उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरने की संभावना बढ़ गई है।

अलीगढ़ नोड के लिए शुरुआत में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, निजी क्षेत्र की कंपनियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की ओर से करीब 2,500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे। अब प्रस्तावित निवेश का आंकड़ा बढ़कर लगभग चार हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। निवेश प्रस्तावों में हुई यह बढ़ोतरी रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण क्षेत्र में अलीगढ़ के बढ़ते महत्व को दिखाती है। हालांकि चार हजार करोड़ रुपये के निवेश की नवीनतम कंपनीवार आधिकारिक सूची की अलग से पुष्टि आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यूपीडा के अंतर्गत उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। इसके छह नोड लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट में हैं। केंद्र सरकार ने देश में रक्षा उत्पादन का आधार मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश तथा तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की थी। यूपीडा को उत्तर प्रदेश के कॉरिडोर के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है।  

अलीगढ़ में कॉरिडोर का विकास खैर रोड स्थित अंडला क्षेत्र में किया गया है। यहां रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को निर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए स्थान उपलब्ध कराया गया है। निवेशकों और रक्षा उद्योग से जुड़ी कंपनियों के बीच समन्वय स्थापित करने में सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स सहयोग कर रही है। इसका सही संक्षिप्त नाम एसआईडीएम है, न कि एआईडीएम।

बेंगलुरु की न्यू स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज कंपनी की फैक्ट्री तैयार की जा रही है। कंपनी को अलीगढ़ नोड में जमीन आवंटित किए जाने संबंधी जानकारी पहले भी प्रकाशित हो चुकी है। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक कंपनी को 3.5 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई थी और उसका प्रस्तावित निवेश 35 करोड़ रुपये बताया गया था।  

एंकर रिसर्च लैब्स भी अपनी फैक्ट्री के भवन और दूसरी आवश्यक सुविधाओं को विकसित करने का काम कर रही है। उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड में कंपनी को अलीगढ़ नोड में 10 हेक्टेयर भूमि आवंटित होने और करीब 550 करोड़ रुपये निवेश की योजना का उल्लेख है। रक्षा मंत्रालय की दिसंबर 2021 की जानकारी में एंकर रिसर्च लैब्स समेत छह कंपनियों को अलीगढ़ नोड में जमीन आवंटित कर सौंपे जाने की पुष्टि की गई थी।  

जानकारी के अनुसार, निर्माणाधीन इकाइयों के अगले वर्ष तक उत्पादन शुरू करने की संभावना है। संबंधित कंपनियों को आवश्यक लाइसेंस जारी किए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि लाइसेंस जारी करने वाले विभाग के रूप में उपलब्ध सामग्री में “रक्षा मंत्रालय का आर्थिकी विभाग” लिखा है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए इसे प्रकाशित करने से पहले लाइसेंस जारी करने वाली सही इकाई और अनुमति के प्रकार की पुष्टि जरूरी होगी।

कॉरिडोर में उत्पादन शुरू होने के बाद स्थानीय एमएसएमई के लिए रक्षा कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने के अवसर बढ़ सकते हैं। बड़ी विनिर्माण इकाइयों को मशीनिंग, धातु के पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, पैकेजिंग, परीक्षण, रखरखाव और दूसरी सहायक सेवाओं की आवश्यकता होती है। ऐसे में स्थानीय छोटे और मध्यम उद्योगों को आवश्यक गुणवत्ता मानकों के अनुसार उत्पाद तैयार करने का अवसर मिल सकता है।

रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन बढ़ने से घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होने की उम्मीद है। इसके माध्यम से विदेशों से खरीदे जाने वाले उपकरणों और कलपुर्जों पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जा रहा है। रक्षा उत्पादन के साथ अनुसंधान, तकनीक और नए उत्पादों के विकास को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। कॉरिडोर का उद्देश्य केवल बड़ी फैक्ट्रियां स्थापित करना नहीं, बल्कि उनके आसपास सहायक उद्योगों का पूरा तंत्र तैयार करना भी है।

अलीगढ़ में पहले से ताला, हार्डवेयर और धातु आधारित उद्योगों की मौजूदगी है। रक्षा उत्पादन से जुड़ी इकाइयों के आने पर स्थानीय उद्योगों को अपनी तकनीक और गुणवत्ता में सुधार कर नए क्षेत्र में प्रवेश करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि किसी स्थानीय इकाई को मिलने वाले ठेके, रोजगार संख्या या उत्पादन क्षमता की विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

फिलहाल अलीगढ़ नोड में नई फैक्ट्रियों के निर्माण और मौजूदा इकाइयों की उत्पादन गतिविधियों से औद्योगिक विकास को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रस्तावित निवेश 2,500 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब चार हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है। निर्माणाधीन कंपनियां तय समय पर उत्पादन शुरू करती हैं तो अलीगढ़ रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।

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