लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद नौकरशाही को अलविदा कह दिया है। उनका इस्तीफा स्वीकार होने के साथ ही 15 सितंबर 2026 से वह भारतीय प्रशासनिक सेवा से मुक्त हो गई हैं। आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग, आईआईएम बेंगलुरु से मैनेजमेंट की पढ़ाई, विदेश में कॉर्पोरेट नौकरी, पहले भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयन और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) तक पहुंचने का उनका सफर बेहद दिलचस्प रहा है।
दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को आईएएस से इस्तीफा देने का फैसला सार्वजनिक किया था। उन्होंने इसके पीछे व्यक्तिगत कारण, पारिवारिक प्राथमिकताओं और जीवन में नए लक्ष्यों की ओर बढ़ने की इच्छा का जिक्र किया। जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। अब उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन उन्होंने अभी अपनी अगली पारी के बारे में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है।
पढ़ाई में शुरू से शानदार सफर
दिव्या मित्तल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि उनकी प्रशासनिक यात्रा जितनी ही दिलचस्प है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित **भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली** से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए **भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) बेंगलुरु** का रुख किया।
देश के दो शीर्ष शिक्षण संस्थानों से पढ़ाई करने के बाद उनके सामने कॉर्पोरेट सेक्टर में शानदार करियर बनाने का विकल्प मौजूद था। उन्होंने कुछ समय तक कॉर्पोरेट जगत में काम भी किया और विदेश में नौकरी की। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने लंदन में भी पेशेवर जीवन बिताया। लेकिन उनका मन लंबे समय तक कॉर्पोरेट नौकरी में नहीं लगा और उन्होंने भारत लौटकर सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला किया।
यह फैसला आसान नहीं था। विदेश की नौकरी और स्थापित करियर छोड़कर यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करना अपने आप में बड़ा जोखिम था। लेकिन दिव्या ने इसी रास्ते को चुना और आखिरकार सफलता हासिल की।
पहले IPS में हुआ चयन
दिव्या मित्तल की यूपीएससी यात्रा भी खास रही। सिविल सेवा परीक्षा में सफलता मिलने के बाद पहले उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा यानी **IPS** के लिए हुआ था।
लेकिन उनका लक्ष्य IAS बनना था। इसलिए उन्होंने चयन होने के बावजूद दोबारा यूपीएससी परीक्षा देने का फैसला किया। अगले प्रयास में उन्होंने अपनी रैंक बेहतर की और 2013 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी बनीं। उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित हुआ।
यूपीएससी की तैयारी करने वाले युवाओं के बीच उनकी कहानी इसी वजह से काफी चर्चित रही है। एक प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट करियर छोड़ना, सिविल सेवा परीक्षा पास करना, पहले IPS हासिल करना और उसके बाद फिर परीक्षा देकर IAS बनना उनके करियर के प्रमुख पड़ाव रहे।
मेरठ से शुरू हुई प्रशासनिक पारी
IAS बनने के बाद दिव्या मित्तल की शुरुआती तैनाती उत्तर प्रदेश में हुई। उन्होंने मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के तौर पर प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्हें अलग-अलग महत्वपूर्ण पदों पर काम करने का मौका मिला।
वह गौतमबुद्ध नगर की मुख्य विकास अधिकारी यानी CDO भी रहीं। इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण में संयुक्त प्रबंध निदेशक और बरेली विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां संभालीं।
इसके बाद उन्हें जिलाधिकारी के रूप में काम करने का मौका मिला। संतकबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया में डीएम के तौर पर उनकी तैनाती रही। जिलों में काम करने के दौरान उनकी प्रशासनिक शैली और कुछ फैसलों ने उन्हें सोशल मीडिया पर भी पहचान दिलाई।
मिर्जापुर में काम की खूब हुई चर्चा
दिव्या मित्तल के प्रशासनिक करियर में मिर्जापुर की पोस्टिंग काफी चर्चित रही। वहां जिलाधिकारी रहते हुए ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या से निपटने के लिए किए गए उनके प्रयास सुर्खियों में आए।
मीडिया रिपोर्टों में लहुरियादह गांव तक पानी पहुंचाने के लिए प्रशासन की पहल का खास तौर पर जिक्र किया गया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाके में पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी। इस मुद्दे पर उनकी सक्रियता ने उन्हें स्थानीय स्तर पर लोकप्रियता भी दिलाई।
सोशल मीडिया पर भी उनके काम से जुड़े कई वीडियो और पोस्ट चर्चा में रहे। आम लोगों से बातचीत और मौके पर पहुंचकर समस्याओं को समझने की उनकी तस्वीरें तथा वीडियो अक्सर सामने आते थे।
देवरिया की DM भी रहीं
मिर्जापुर के बाद दिव्या मित्तल को देवरिया सहित दूसरे जिलों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। देवरिया की जिलाधिकारी के तौर पर भी उनका कार्यकाल चर्चा में रहा।
मई 2026 में उनका देवरिया से तबादला कर दिया गया। इसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई। इसी पद पर रहते हुए उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा छोड़ने का फैसला किया।
हालांकि उनके तबादले और इस्तीफे को लेकर राजनीतिक तथा प्रशासनिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई गईं, लेकिन दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत कारणों, पारिवारिक प्राथमिकताओं और भविष्य के लक्ष्यों की बात कही है। इसलिए किसी अन्य कारण को पक्के तथ्य के रूप में जोड़ना उचित नहीं होगा।
पति भी छोड़ चुके हैं सरकारी सेवा
दिव्या मित्तल के पति **गगनदीप सिंह ढिल्लों** भी सिविल सेवा से जुड़े रहे हैं। वह 2011 बैच के भारतीय व्यापार सेवा अधिकारी थे। बाद में उन्होंने भी सरकारी सेवा छोड़ने का फैसला किया।
रिपोर्टों के मुताबिक, गगनदीप सिंह ढिल्लों ने 2022 में सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाया। अब दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद यह चर्चा भी है कि क्या वह अपने पति की तरह उद्यमिता या किसी अन्य क्षेत्र में नई शुरुआत करेंगी।
हालांकि दिव्या ने अभी इस बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।
सोशल मीडिया पर भी बड़ी पहचान
दिव्या मित्तल उन प्रशासनिक अधिकारियों में शामिल रही हैं जिनकी सोशल मीडिया पर भी अच्छी पहचान बनी। वह प्रशासनिक कामकाज के अलावा पढ़ाई, प्रेरणा, जीवन और यूपीएससी से जुड़े विषयों पर भी अपने विचार साझा करती रही हैं।
यूपीएससी अभ्यर्थियों के बीच उनके टाइम मैनेजमेंट और तैयारी से जुड़े सुझाव भी चर्चा में रहे हैं। IIT और IIM से पढ़ाई करने के बाद सिविल सेवा चुनने की उनकी कहानी युवाओं के बीच दिलचस्पी का विषय रही है।
यही कारण है कि उनके इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने उनके अगले कदम को लेकर उत्सुकता दिखाई।
इस्तीफा मंजूर होने पर लिखी खास पंक्ति
आईएएस सेवा से इस्तीफा मंजूर होने के बाद दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर एक संक्षिप्त लेकिन चर्चित संदेश साझा किया। उन्होंने जयशंकर प्रसाद की पंक्तियां लिखीं—**"प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो।"**
उनकी इस पोस्ट को नई शुरुआत से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि अब वह किस क्षेत्र में काम करने वाली हैं।
इसी कारण उनके राजनीति में प्रवेश से लेकर सामाजिक क्षेत्र और उद्यमिता तक कई संभावनाओं की चर्चा हो रही है।
क्या अब राजनीति में आएंगी दिव्या मित्तल?
दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके राजनीति में आने को लेकर है। खास तौर पर मिर्जापुर से 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने की अटकलें सामने आई हैं।
इसके पीछे मिर्जापुर में डीएम रहते हुए उनकी पहचान और स्थानीय लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता को वजह बताया जा रहा है। कुछ राजनीतिक नेताओं की ओर से भी उनके भविष्य को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि **दिव्या मित्तल ने अभी किसी राजनीतिक दल में शामिल होने या विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं की है।** इसलिए उन्हें किसी पार्टी का संभावित उम्मीदवार बताना अभी जल्दबाजी होगी।
13 साल बाद जिंदगी की नई पारी
IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग, IIM बेंगलुरु से मैनेजमेंट, विदेश में कॉर्पोरेट नौकरी, UPSC की तैयारी, पहले IPS और फिर IAS—दिव्या मित्तल का सफर कई बड़े पड़ावों से होकर गुजरा है।
2013 बैच की IAS अधिकारी के रूप में उन्होंने करीब 13 साल तक प्रशासनिक सेवा में काम किया। इस दौरान उन्होंने संयुक्त मजिस्ट्रेट, CDO, विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष, जिलाधिकारी और विशेष सचिव जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
अब 15 सितंबर 2026 से उनकी प्रशासनिक पारी समाप्त हो गई है और एक नई शुरुआत का रास्ता खुल गया है। वह राजनीति चुनती हैं, उद्यमिता की ओर जाती हैं या किसी सामाजिक पहल से जुड़ती हैं—इसका जवाब उनके अगले आधिकारिक ऐलान से ही मिलेगा।
फिलहाल इतना साफ है कि **IIT-IIM से लेकर IPS और फिर IAS तक पहुंचने वाली दिव्या मित्तल ने अपने करियर में कई बड़े बदलाव किए हैं और अब सरकारी सेवा छोड़कर एक बार फिर जिंदगी की नई दिशा चुनने जा रही हैं।**
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