लखनऊ : लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में सामने आई गंभीर खामियों पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक और दंडात्मक कदम उठाया है। एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में बार-बार सड़क उखड़ने और सतह धंसने की घटनाओं के बाद निर्माण कंपनी **पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड** के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एनएचएआई ने कंपनी को **“नॉन परफॉर्मर” घोषित करने की प्रक्रिया** शुरू कर दी है। यदि यह कार्रवाई पूरी हो जाती है तो कंपनी भविष्य में एनएचएआई की नई परियोजनाओं के टेंडर में हिस्सा नहीं ले सकेगी। इसके साथ ही मरम्मत कार्य पूरा होने तक एक्सप्रेसवे को टोल फ्री करने का फैसला लिया गया है।
हाल के सप्ताहों में जुलाई और अगस्त के दौरान एक्सप्रेसवे के किलोमीटर-64 के आसपास सड़क की ऊपरी परत उखड़ने और कई स्थानों पर धंसने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। बताया गया कि एक्सप्रेसवे के करीब आठ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई, जबकि इसका संचालन शुरू हुए अभी अधिक समय भी नहीं हुआ था। इस स्थिति ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी और सोशल मीडिया से लेकर विशेषज्ञों तक ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
एनएचएआई के मुख्य महाप्रबंधक एवं उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने बताया कि केवल निर्माण कंपनी ही नहीं, बल्कि परियोजना की निगरानी करने वाले स्वतंत्र इंजीनियरिंग सलाहकार और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब तक क्षतिग्रस्त हिस्से की पूरी तरह मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक एक्सप्रेसवे पर किसी भी प्रकार का टोल नहीं लिया जाएगा। इस दौरान होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई भी निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक से ही कराई जाएगी।
एनएचएआई ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों न की जाए। प्रस्तावित कार्रवाई में कंपनी की प्रदर्शन सुरक्षा राशि का दो प्रतिशत जुर्माना, जिम्मेदार अधिकारियों पर तीन वर्ष तक प्रतिबंध लगाने की सिफारिश तथा कंपनी की प्रदर्शन रेटिंग घटाने जैसे कदम शामिल हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि क्षतिग्रस्त हिस्से का पूरा पुनर्निर्माण कंपनी अपने खर्च पर करेगी, जिसकी अनुमानित लागत लगभग तीन करोड़ रुपये बताई जा रही है।
निर्माण कार्य की निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। परियोजना प्रबंधक विवेक कुमार गुप्ता, स्वतंत्र इंजीनियर टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से परियोजना से हटा दिया गया है। साथ ही उन्हें दो वर्षों तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई और एनएचआईडीसीएल की परियोजनाओं से प्रतिबंधित कर दिया गया है। वर्तमान परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को उनके मूल विभाग वापस भेज दिया गया है, जबकि पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया सहित दोनों अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही के आरोप में आरोपपत्र जारी करने का निर्णय लिया गया है।
मामले में केवल निर्माण कंपनी ही नहीं बल्कि गुणवत्ता की निगरानी करने वाली **थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड** भी जांच के दायरे में आ गई है। एनएचएआई ने इस सलाहकार कंपनी के खिलाफ भी भविष्य की परियोजनाओं से प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्राधिकरण का मानना है कि यदि निगरानी समय पर और प्रभावी ढंग से की गई होती तो इतनी बड़ी तकनीकी खामियां सामने नहीं आतीं।
एक्सप्रेसवे की संपूर्ण गुणवत्ता की जांच के लिए अब आधुनिक **लेजर प्रोफाइलोमीटर तकनीक** का उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक के जरिए सड़क की सतह में मौजूद सूक्ष्म दरारों, असमानता और अन्य छिपी हुई तकनीकी कमियों का पता लगाया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न हो।
इसके अलावा एनएचएआई ने **आईआईटी खड़गपुर** के प्रोफेसर के.एस. रेड्डी की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति भी गठित की है। यह समिति सड़क की डिजाइन, निर्माण सामग्री, निर्माण पद्धति, जल निकासी व्यवस्था, आधार परत तथा गुणवत्ता नियंत्रण की विस्तृत तकनीकी जांच करेगी। समिति यह भी पता लगाएगी कि एक्सप्रेसवे के निर्माण के तुरंत बाद सड़क बार-बार क्यों उखड़ रही है और इसके लिए कौन-कौन से कारक जिम्मेदार हैं।
एनएचएआई का कहना है कि प्रभावित हिस्सों पर यातायात को सुरक्षित तरीके से डायवर्ट किया गया है ताकि यात्रियों को अधिक परेशानी न हो। जब तक सभी क्षतिग्रस्त हिस्सों की पूरी तरह मरम्मत नहीं हो जाती और विशेषज्ञ समिति अपनी रिपोर्ट नहीं दे देती, तब तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली बंद रहेगी। प्राधिकरण ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए भविष्य में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए और भी सख्त मानक लागू किए जाएंगे।