रामपुर। समाजवादी पार्टी नेता आजम खां के जौहर विश्वविद्यालय को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। जल निगम ने वर्ष 2013 में जौहर विश्वविद्यालय के लिए करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण कराया था। आरोप है कि इस एसटीपी का संचालन आज भी जल निगम अपने खर्च पर कर रहा है, जबकि इसके बदले विश्वविद्यालय प्रबंधन से अब तक कोई यूजर चार्ज नहीं लिया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जल निगम ने जौहर विश्वविद्यालय के लिए पांच एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाला एसटीपी तैयार कराया था। इस प्लांट के संचालन और रखरखाव पर हर साल लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें प्रतिमाह करीब 10 लाख रुपये संचालन और लगभग 25 लाख रुपये सालाना मरम्मत पर खर्च होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद जल निगम को विश्वविद्यालय से यूजर चार्ज के रूप में कोई राशि प्राप्त नहीं हो रही है।
मामले के अनुसार, वर्ष 2013 में रामपुर नगर पालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ) शहंशाह वली खां ने जल निगम के मुख्य अभियंता को पत्र लिखकर जौहर विश्वविद्यालय क्षेत्र में एसटीपी निर्माण का प्रस्ताव भेजा था। पत्र में कहा गया था कि जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद आसपास के क्षेत्रों में शिक्षा और विकास गतिविधियां बढ़ रही हैं, इसलिए क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं का विस्तार जरूरी है।
इसके बाद जल निगम ने प्रस्ताव के आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की और एसटीपी निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी। उस समय आजम खां प्रदेश सरकार में नगर विकास मंत्री के साथ-साथ जल निगम के अध्यक्ष भी थे। इसी वजह से इस परियोजना को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठाए जाते रहे हैं।
एसटीपी निर्माण के समय इसे आसपास की आबादी के लिए जरूरी सुविधा बताया गया था, लेकिन वर्तमान में इसका सबसे अधिक लाभ जौहर विश्वविद्यालय को मिलने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि नियमानुसार जिस संस्था के लिए इस तरह की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, उससे संचालन खर्च के लिए यूजर चार्ज लिया जाना चाहिए। अनुमान के मुताबिक जल निगम को हर साल करीब डेढ़ करोड़ रुपये की राशि विश्वविद्यालय से प्राप्त करनी चाहिए थी, लेकिन लंबे समय से यह वसूली नहीं हो पाई है।
मामले में जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि एसटीपी संचालन की व्यवस्था पहले से चली आ रही है। जल निगम के अधिशासी अभियंता देवेंद्र सिंह ने बताया कि वह पिछले वर्ष ही पद पर आए हैं। एसटीपी संचालन की प्रक्रिया पूर्ववत जारी है और इस संबंध में उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं दूसरी ओर जौहर विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे छात्रों के भविष्य को लेकर भी प्रशासन ने कदम उठाए हैं। विश्वविद्यालय पर चल रही कार्रवाई के बीच जिला प्रशासन और गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था की है। जौहर विश्वविद्यालय में स्नातक और परास्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले छात्र अब गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में विशेष पंजीकरण के माध्यम से प्रवेश ले सकेंगे।
इसके लिए 20 जुलाई से विशेष प्रक्रिया शुरू की गई है। जौहर विश्वविद्यालय में जमा की गई फीस वापस कराने की प्रक्रिया भी रामपुर प्रशासन की ओर से की जाएगी। हालांकि उच्च सेमेस्टर में पढ़ रहे छात्रों के भविष्य को लेकर फैसला अकादमिक काउंसिल द्वारा लिया जाएगा।
छात्रों की सहायता के लिए विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर काउंसलिंग सेंटर बनाया गया है। यहां जिला विद्यालय निरीक्षक, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी और शिक्षकों की टीम विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई, प्रवेश प्रक्रिया और अन्य विकल्पों के संबंध में जानकारी दे रही है।
जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े इस मामले में अब एसटीपी निर्माण, उसके संचालन खर्च और यूजर चार्ज की वसूली को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। जल निगम पर पड़ रहे आर्थिक भार को देखते हुए आने वाले दिनों में इस व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है।