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- नोएडा PG फायर केस में...

नोएडा: मामूरा गांव स्थित एनसीआर पीजी में हुए भीषण अग्निकांड मामले में नया खुलासा सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आग ई-बाइक से नहीं बल्कि एक ई-स्कूटी की बैटरी फटने के कारण लगी थी। बैटरी में हुए ब्लास्ट के बाद निकली चिंगारियों ने देखते ही देखते आसपास खड़े वाहनों और पीजी के हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में एक युवती समेत दो लोगों की मौत हो गई थी।
यह दर्दनाक घटना नोएडा सेक्टर-66 के मामूरा गांव स्थित चार मंजिला इमारत में चल रहे पीजी में हुई थी। हादसे के बाद शुरुआती जानकारी में आशंका जताई गई थी कि आग ई-बाइक में लगी है, लेकिन अब जांच में सामने आया है कि आग की शुरुआत ई-स्कूटी से हुई थी। हालांकि पुलिस ने अभी आधिकारिक रूप से ई-बाइक या ई-स्कूटी की पुष्टि नहीं की है। आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि जिस वाहन में आग लगी थी, वह ई-स्कूटी थी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, ई-स्कूटी को दूसरी मंजिल से तार लटकाकर चार्ज किया जाता था। इसी दौरान बैटरी ओवरहीट होने के कारण उसमें विस्फोट हो गया और आग फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बैटरी फटने के बाद काफी दूर तक चिंगारियां गिरीं, जिससे आसपास खड़े करीब 17 वाहन भी आग की चपेट में आ गए।
पीजी में रहने वाले अरुण ने बताया कि वह रोज सुबह कार्यालय जाने के समय स्कूटी को चार्जिंग पर लगा हुआ देखते थे। उन्होंने बताया कि स्कूटी का रंग डार्क था और वह किसी बड़े ब्रांड की नहीं लग रही थी। स्कूटी का मालिक डिलीवरी का काम करता था और पिछले करीब एक साल से इसी पीजी में रह रहा था। घटना के बाद से स्कूटी मालिक फरार है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है।
पुलिस और अग्निशमन विभाग के लिए जली हुई स्कूटी की पहचान करना भी चुनौती बना हुआ है। आग इतनी भीषण थी कि वाहन पूरी तरह जलकर क्षतिग्रस्त हो गया है। अब पुलिस फोरेंसिक जांच के माध्यम से स्कूटी के मॉडल, वाहन नंबर और उसके मालिक की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।
प्रत्यक्षदर्शी राजू ने बताया कि बैटरी ब्लास्ट के बाद अचानक तेज आवाज हुई और चिंगारियां चारों तरफ फैल गईं। देखते ही देखते आग ने आसपास खड़े वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। लोगों ने किसी तरह कुछ वाहनों को बाहर निकाल लिया, लेकिन कई वाहन पूरी तरह जल गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी को चार्ज करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। खराब वायरिंग, गलत चार्जर, ओवरलोडिंग या लंबे समय तक चार्जिंग पर लगे रहने से बैटरी गर्म हो सकती है और आग लगने का खतरा बढ़ सकता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, घर या पीजी में इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करते समय हमेशा कंपनी के ओरिजिनल चार्जर का इस्तेमाल करना चाहिए। चार्जिंग पॉइंट के लिए अलग इलेक्ट्रिक सर्किट होना चाहिए और एक्सटेंशन बोर्ड या अतिरिक्त तारों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। इसके अलावा मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (MCB), रेसिडुअल करेंट सर्किट ब्रेकर (RCCB) और सही अर्थिंग की व्यवस्था भी जरूरी है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि चार्जिंग के दौरान यदि जलने की गंध आए, तार गर्म हो जाएं या वायरिंग में कोई खराबी दिखाई दे तो तुरंत वाहन को चार्जिंग से हटाकर तकनीशियन या कंपनी से संपर्क करना चाहिए।
नोएडा के इस हादसे ने एक बार फिर इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर किसकी लापरवाही से यह हादसा हुआ। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक वजह और जिम्मेदार लोगों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





