Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रयागराज में आस्था और श्रद्धा का भव्य दृश्य देखने को मिला। माघ मेले की शुरुआत के इस प्रमुख स्नान पर्व पर सुबह तड़के से ही श्रद्धालुओं का सैलाब संगम और विभिन्न घाटों की ओर उमड़ पड़ा। प्रशासन के अनुसार, सुबह से लेकर शाम करीब 6 बजे तक लगभग 23 लाख श्रद्धालुओं और कल्पवासियों ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में पवित्र स्नान किया। प्रयागराज माघ मेला के जिलाधिकारी ऋषिराज ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए घाटों का दायरा बढ़ाया गया है और घाटों की संख्या में भी वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा,
“इस बार हमारा प्रयास रहा कि श्रद्धालुओं को स्नान के लिए अधिक पैदल न चलना पड़े। इसलिए घाटों को बड़े स्तर पर विकसित किया गया, ताकि लोग अपने नजदीकी घाट पर ही स्नान कर सकें। पौष पूर्णिमा को माघ मेले का पहला और सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व माना जाता है। इसी दिन से कल्पवास की विधिवत शुरुआत होती है। बड़ी संख्या में कल्पवासी संगम तट पर पहुंचकर एक माह तक तप, साधना और संयम के साथ जीवन व्यतीत करते हैं। इस वर्ष भी देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु और संत प्रयागराज पहुंचे हैं।
प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा को लेकर व्यापक इंतजाम किए थे। घाटों पर गोताखोरों की तैनाती, मेडिकल कैंप, एंबुलेंस सेवा, पेयजल, शौचालय और प्रकाश व्यवस्था को विशेष रूप से मजबूत किया गया। भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस और पीएसी के जवान लगातार मुस्तैद रहे। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की गई, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके। जिलाधिकारी ऋषिराज ने बताया कि श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग की भी विशेष व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालुओं को पैदल मार्गों के माध्यम से सुरक्षित रूप से घाटों तक पहुंचाया गया। कहीं भी भगदड़ या अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली, जो प्रशासनिक व्यवस्था की सफलता को दर्शाता है।
श्रद्धालुओं ने भी इस बार की व्यवस्थाओं की सराहना की। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि पहले की तुलना में घाटों तक पहुंचना आसान रहा और स्नान प्रक्रिया भी सुचारू रही। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए बनाए गए विशेष मार्ग और सुविधाएं काफी मददगार साबित हुईं। माघ मेले के दौरान आने वाले अन्य प्रमुख स्नान पर्वों—मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि—को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ेगी, ऐसे में अतिरिक्त सुरक्षा और सुविधा उपाय लागू किए जाएंगे। पौष पूर्णिमा के साथ ही माघ मेले की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों ने गति पकड़ ली है। संगम तट पर भक्ति, साधना और सेवा का वातावरण बना हुआ है, जहां श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
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