एक्सप्रेसवे पर फिर उभरा 5 मीटर लंबा गड्ढा, PNC इंफ्राटेक ने शुरू की मरम्मत

Update: 2026-08-06 14:33 GMT
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर एक बार फिर सड़क धंसने की घटना सामने आने से इसकी निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गुरुवार को बेहटा गांव के पास एक्सप्रेसवे की तेज रफ्तार वाली लेन पर करीब पांच मीटर लंबा और लगभग डेढ़ मीटर गहरा हिस्सा अचानक धंस गया। घटना के बाद निर्माण कंपनी और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में मौके पर मरम्मत कार्य शुरू कराया गया, लेकिन लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा और परियोजना की गुणवत्ता पर नई बहस छेड़ दी है।
जानकारी के अनुसार यह धंसाव लखनऊ से कानपुर जाने वाली दिशा में किलोमीटर-63 के पास 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की निर्धारित गति वाली लेन पर हुआ। सड़क का हिस्सा धंसने की सूचना मिलते ही निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक के अधिकारी और तकनीकी टीम मौके पर पहुंच गई। जेसीबी मशीनों की मदद से पहले क्षतिग्रस्त हिस्से की मिट्टी हटाई गई और फिर गिट्टी तथा सीमेंट के मिश्रण से गड्ढे को भरने का कार्य शुरू किया गया। बताया गया कि क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के लिए कई डंपर निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया और देर तक मरम्मत का कार्य जारी रहा।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब एक दिन पहले ही एनएचएआई ने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर सख्त कदम उठाए थे। लगातार सामने आ रही शिकायतों और सड़क धंसने की घटनाओं के बाद परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को उनके पद से हटा दिया गया। इसके साथ ही पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया के खिलाफ आरोप पत्र तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। निर्माण कार्य करने वाली कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक को ‘नॉन परफॉर्मर’ घोषित करते हुए पूरे मामले की तकनीकी जांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर से कराने का निर्णय लिया गया है। जांच पूरी होने तक एक्सप्रेसवे को टोल मुक्त रखने का भी फैसला लिया गया है।
गौरतलब है कि 13 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस महत्वाकांक्षी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। इसे प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल किया गया था, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद जताई गई थी। उद्घाटन के बाद बड़ी संख्या में वाहन इस मार्ग से गुजरने लगे और एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार यातायात शुरू हो गया।
हालांकि उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे। पिछले कुछ दिनों में तूरी गांव, जगेथा, कोरारी, बेगमखेड़ा और बेहटा जैसे कई स्थानों पर सड़क धंसने या सतह खराब होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने निर्माण सामग्री, डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया की गुणवत्ता पर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते मूल कारणों की पहचान कर स्थायी समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
फिलहाल सबसे बड़ी निगाहें आईआईटी खड़गपुर की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सड़क बार-बार धंसने के पीछे डिजाइन संबंधी त्रुटि, निर्माण कार्य में लापरवाही, जल निकासी व्यवस्था की कमी या निर्माण सामग्री की खराब गुणवत्ता जिम्मेदार है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
उधर, स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के कुछ ही दिनों के भीतर बार-बार सड़क धंसना बेहद गंभीर मामला है। लोगों ने मांग की है कि केवल अस्थायी मरम्मत करने के बजाय पूरे एक्सप्रेसवे का तकनीकी ऑडिट कराया जाए और जहां भी निर्माण में कमी मिली हो, वहां स्थायी सुधार सुनिश्चित किया जाए ताकि यात्रियों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो।
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