लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी चुनावी रणनीति तेज कर दी है। सपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जल्द ही प्रदेशव्यापी ‘पीडीए रथ यात्रा’ शुरू करने की तैयारी में हैं। इस यात्रा के लिए तैयार की गई कैंपेन बस अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई है। बस के रंग को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है।

ओमप्रकाश राजभर ने बयान में सपा की कैंपेन बस के भगवा रंग को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की ओर से इस्तेमाल किया जा रहा भगवा रंग उनकी राजनीतिक छवि से मेल नहीं खाता। राजभर ने कहा कि यह रंग केवल दिखावे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और इसे लेकर जनता को सतर्क रहना चाहिए।

राजभर ने अपने बयान में सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का भगवा रंग अपनाना एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले अलग तरह की राजनीति करते थे, वे अब नए रंग और प्रतीकों के सहारे जनता के बीच जाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे थे। राजभर ने कहा कि जब सपा सत्ता में थी, तब गुंडा-माफिया और गैंगवार जैसी घटनाओं को लेकर शिकायतें सामने आती थीं। हालांकि, ये आरोप राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से चल रहे आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा रहे हैं।

सपा की PDA रथ यात्रा की तैयारी

समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश में जनसंपर्क अभियान की तैयारी कर रही है। ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को केंद्र में रखकर पार्टी अपनी रणनीति तैयार कर रही है। अखिलेश यादव इस यात्रा के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर जनता से संवाद करने की योजना बना रहे हैं।

सपा की ओर से तैयार की गई कैंपेन बस को इसी अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। पार्टी का उद्देश्य इस रथ यात्रा के जरिए अपने संगठन को सक्रिय करना और विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाना है।

रंग को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस

कैंपेन बस के रंग को लेकर शुरू हुई बहस ने चुनावी माहौल में एक नया मुद्दा जोड़ दिया है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों की ओर से सपा पर निशाना साधा जा रहा है, जबकि सपा नेताओं का कहना है कि पार्टी की प्राथमिकता जनता के मुद्दे हैं।

राजनीतिक दल चुनावों के दौरान अक्सर प्रतीकों, नारों और प्रचार सामग्री के माध्यम से मतदाताओं तक अपना संदेश पहुंचाते हैं। ऐसे में चुनावी बस, झंडे, पोस्टर और रंग भी राजनीतिक पहचान का हिस्सा बन जाते हैं।

अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति

अखिलेश यादव पिछले कुछ समय से पीडीए के मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। सपा का कहना है कि वह सामाजिक न्याय और सभी वर्गों की भागीदारी के मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी। पार्टी की रणनीति पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की है।

वहीं, भाजपा और उसके सहयोगी दल सपा की नीतियों और पुराने शासनकाल को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। चुनावी समय में दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है।

राजभर और सपा के बीच पहले भी रही है राजनीतिक टक्कर

ओमप्रकाश राजभर उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनकी पार्टी सुभासपा ने अलग-अलग समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन किया है। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं।

राजभर और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं। दोनों दलों के नेता एक-दूसरे की नीतियों और राजनीतिक रणनीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं।

चुनाव से पहले बढ़ेगी बयानबाजी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, वैसे-वैसे नेताओं के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

सपा की पीडीए रथ यात्रा जहां पार्टी के जनसंपर्क अभियान का हिस्सा है, वहीं विपक्षी दल इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कैंपेन बस के रंग को लेकर शुरू हुआ विवाद इसी राजनीतिक माहौल का हिस्सा माना जा रहा है।

फिलहाल अखिलेश यादव की रथ यात्रा शुरू होने से पहले ही उसकी प्रचार सामग्री और बस का रंग राजनीतिक चर्चा में आ गया है। एक ओर सपा इसे अपने अभियान का माध्यम बता रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा और सहयोगी दल इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पीडीए रथ यात्रा के जरिए सपा किस तरह जनता तक पहुंच बनाती है और चुनावी मैदान में इसका कितना असर दिखाई देता है।

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