हैदराबाद। भारत में कैंसर के आधुनिक उपचार को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। भारत बायोटेक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी न्यूक्लियन थेरेप्यूटिक्स प्राइवेट लिमिटेड ने हैदराबाद स्थित प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी कंपनी वीजेन बायो प्राइवेट लिमिटेड के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को घोषित इस सहयोग का उद्देश्य भारत में अत्याधुनिक सेल थेरेपी के लिए तकनीक हस्तांतरण, क्लिनिकल मैन्युफैक्चरिंग और व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन क्षमता विकसित करना है। दोनों कंपनियां मिलकर मल्टीपल मायलोमा जैसे गंभीर ब्लड कैंसर के उपचार के लिए विकसित की जा रही नई CAR-T सेल थेरेपी पर काम करेंगी।
कैंसर के इलाज के लिए विकसित होगी नई थेरेपी
इस समझौते के तहत न्यूक्लियन थेरेप्यूटिक्स, वीजेन बायो की प्रमुख थेरेपी VL-2511 के लिए तकनीक हस्तांतरण और निर्माण साझेदार के रूप में काम करेगी।VL-2511 एक डुअल BCMA/CD19 ऑटोलॉगस CAR-T सेल थेरेपी है, जिसे मल्टीपल मायलोमा के उपचार के लिए विकसित किया जा रहा है। मल्टीपल मायलोमा रक्त कैंसर का एक प्रकार है, जो प्लाज्मा कोशिकाओं को प्रभावित करता है।इस अत्याधुनिक उपचार पद्धति में मरीज की अपनी प्रतिरक्षा कोशिकाओं को प्रयोगशाला में संशोधित किया जाता है, ताकि वे कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन पर हमला कर सकें।हालांकि, VL-2511 अभी विकास और क्लिनिकल परीक्षण की प्रक्रिया में है। इसे सामान्य मरीजों के लिए स्वीकृत उपचार के रूप में उपलब्ध कराने से पहले आवश्यक परीक्षण और नियामकीय मंजूरियां हासिल करनी होंगी।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार होगा निर्माण
समझौते के अनुसार, VL-2511 का निर्माण न्यूक्लियन की एकीकृत गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) सुविधा में किया जाएगा।कंपनी का कहना है कि इस निर्माण केंद्र को भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO), अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (US FDA) और यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी (EMA) के नियामकीय मानकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।इसका उद्देश्य गुणवत्ता, सुरक्षा और उत्पादन में निरंतरता सुनिश्चित करना है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादन क्षमता विकसित होने से भविष्य में भारतीय सेल थेरेपी उत्पादों के वैश्विक बाजार तक पहुंचने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
उत्पादन लागत कम करने पर विशेष ध्यान
दोनों कंपनियों का सहयोग मुख्य रूप से उपचार संबंधी शोध को व्यावहारिक उत्पादन तक पहुंचाने, प्रक्रिया विकास और बड़े पैमाने पर विनिर्माण क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा।यह समझौता दवा की मार्केटिंग या वितरण के लिए नहीं किया गया है।कंपनियां उत्पादन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने, निर्माण के दौरान उत्पाद की प्राप्त मात्रा बढ़ाने और परिचालन दक्षता सुधारने पर काम करेंगी।इस पहल का प्रमुख उद्देश्य उन्नत सेल थेरेपी की निर्माण लागत कम करना है, ताकि भविष्य में ऐसे उपचार अधिक मरीजों तक पहुंचाए जा सकें।
रघु मलापाका ने बताई साझेदारी की अहमियत
न्यूक्लियन थेरेप्यूटिक्स के मुख्य व्यवसाय अधिकारी डॉ. रघु मलापाका ने कहा कि कई CAR-T थेरेपी कार्यक्रम वैज्ञानिक रूप से आशाजनक होने के बावजूद बड़े पैमाने पर विश्वसनीय उत्पादन की चुनौतियों के कारण आगे नहीं बढ़ पाते।उन्होंने बताया कि न्यूक्लियन का उद्देश्य अनुसंधान, प्रक्रिया विकास और व्यावसायिक उत्पादन के बीच मौजूद इस अंतर को कम करना है।मलापाका के अनुसार, वीजेन बायो के डुअल-टारगेट CAR-T कार्यक्रम पर सहयोग भारत में उन्नत उपचार निर्माण की क्षमता को मजबूत करेगा। इससे भविष्य में इन उपचारों को अधिक मरीजों तक पहुंचाने में सहायता मिल सकती है।
भविष्य में अन्य सेल थेरेपी पर भी होगा काम
इस साझेदारी को केवल VL-2511 तक सीमित नहीं रखने की योजना है। दोनों कंपनियां भविष्य में वीजेन बायो की विकासाधीन अन्य सेल थेरेपी पर भी सहयोग कर सकती हैं।न्यूक्लियन अपनी निर्माण सुविधाएं, तकनीकी विशेषज्ञता और उत्पादन क्षमता उपलब्ध कराएगी, जबकि वीजेन बायो वैज्ञानिक अनुसंधान तथा नई उपचार तकनीकों के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगी।दोनों कंपनियां उपचार को भारत में क्लिनिकल परीक्षणों के अगले चरण तक ले जाने की दिशा में काम कर रही हैं। व्यावसायिक उत्पादन का लक्ष्य 2028 रखा गया है, जो आवश्यक नियामकीय मंजूरियों और विकास की सफलता पर निर्भर करेगा।
भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम
भारत में कैंसर के अत्याधुनिक उपचार की लागत और सीमित उपलब्धता मरीजों के सामने बड़ी चुनौती है। विशेष रूप से जटिल ब्लड कैंसर के मामलों में आधुनिक उपचार तकनीकों की जरूरत बढ़ रही है।ऐसे में न्यूक्लियन थेरेप्यूटिक्स और वीजेन बायो की यह साझेदारी स्वदेशी उत्पादन क्षमता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।यदि परीक्षण सफल रहते हैं और सभी आवश्यक मंजूरियां मिलती हैं, तो भविष्य में भारतीय मरीजों के लिए नई सेल थेरेपी के विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।