मोहन भागवत का Gen Z पर बयान, भावुक पीढ़ी बताया

Update: 2026-07-27 04:38 GMT

हैदराबाद : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने युवा पीढ़ी यानी ‘जेनरेशन Z’ (Gen Z) के स्वभाव और सोच को लेकर अपनी राय व्यक्त की है। हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि Gen Z स्वभाव से अच्छी, परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने वाली और भावनात्मक रूप से प्रभावित होने वाली पीढ़ी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह पीढ़ी कई बार किसी मुद्दे पर शांत मन से विचार करने के बजाय भावनाओं के आधार पर प्रतिक्रिया देती है।

कार्यक्रम के दौरान युवाओं के व्यवहार और सामाजिक बदलावों में उनकी भूमिका पर चर्चा करते हुए RSS प्रमुख ने कहा कि Gen Z उन विचारों और आंदोलनों की ओर तेजी से आकर्षित होती है, जो उन्हें वास्तविक और स्पष्ट दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई विचार या मुद्दा उन्हें सही और प्रामाणिक लगता है, तो वे उससे जल्दी जुड़ जाते हैं।

भागवत ने कहा, “जेन Z स्वभाव से अच्छी, हालात के हिसाब से ढलने वाली और भावुक पीढ़ी है। वे बहुत शांत मन से नहीं सोचते। अगर कोई चीज उन्हें साफ तौर पर असली लगती है, तो वे उससे जुड़ जाते हैं।” उन्होंने युवाओं की इसी प्रवृत्ति को सामाजिक आंदोलनों और बदलावों से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

RSS प्रमुख ने अपने संबोधन में सामाजिक आंदोलनों का उदाहरण देते हुए ‘स्त्री मुक्ति आंदोलन’ (Women's Liberation Movement) का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन को युवाओं के बीच काफी समर्थन मिला था, लेकिन बाद में समाज के एक हिस्से को इससे गुमराह होने की स्थिति का सामना करना पड़ा। उनके इस बयान के बाद सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में चर्चा शुरू हो गई है।

मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में Gen Z को एक ऐसी पीढ़ी के रूप में देखा जाता है, जो तकनीक, सोशल मीडिया और तेजी से बदलते सामाजिक माहौल के बीच बड़ी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पीढ़ी सूचना तक आसान पहुंच रखती है और सामाजिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक मुद्दों पर अपनी राय तेजी से व्यक्त करती है।

Gen Z को आमतौर पर वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्म लेने वाली पीढ़ी के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह पीढ़ी इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के व्यापक प्रभाव के बीच बड़ी हुई है। सोशल मीडिया के कारण इस पीढ़ी की भागीदारी सामाजिक अभियानों और जन आंदोलनों में भी पहले की तुलना में अधिक दिखाई देती है।

भागवत ने अपने संबोधन में युवाओं की सकारात्मक विशेषताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह पीढ़ी नई परिस्थितियों के अनुरूप खुद को बदलने की क्षमता रखती है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भावनात्मक जुड़ाव के साथ-साथ किसी भी विचार या आंदोलन को समझने के लिए गहराई से विचार करना जरूरी है।

उनके बयान के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने इसे युवाओं के व्यवहार पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी बताया, जबकि कुछ लोगों ने सामाजिक आंदोलनों को लेकर उनके विचारों पर सवाल उठाए हैं। विशेष रूप से ‘स्त्री मुक्ति आंदोलन’ को लेकर की गई टिप्पणी पर बहस तेज हो गई है।

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि युवाओं की भूमिका आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। डिजिटल माध्यमों के विस्तार ने युवाओं को अपनी बात रखने और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी करने का नया मंच दिया है। ऐसे में युवाओं की सोच, प्राथमिकताओं और सामाजिक आंदोलनों से उनके जुड़ाव को लेकर लगातार चर्चा होती रहती है।

मोहन भागवत समय-समय पर सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार रखते रहे हैं। हैदराबाद में दिया गया उनका यह संबोधन भी युवाओं की भूमिका और बदलते सामाजिक परिदृश्य पर केंद्रित रहा। उनके बयान ने Gen Z की सोच, व्यवहार और सामाजिक भागीदारी को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है।

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