तेलंगाना : एक मंत्री का अलग अंदाज उस समय देखने को मिला, जब उन्होंने एक सरकारी स्थान के वॉशरूम में गंदगी देखकर नाराजगी जताई और खुद सफाई करने लगे। मंत्री के इस कदम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें वह सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए खुद झाड़ू और सफाई का सामान लेकर सफाई करते नजर आए।
जानकारी के अनुसार, मंत्री किसी निरीक्षण या दौरे के दौरान वहां पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने वॉशरूम की स्थिति देखी तो वह हैरान रह गए। गंदगी देखकर उन्होंने वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों से सवाल किया कि आखिर इतनी खराब स्थिति क्यों है। उन्होंने सफाई व्यवस्था में लापरवाही को लेकर नाराजगी जाहिर की।
मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वच्छता व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद उन्होंने खुद सफाई शुरू कर दी और कर्मचारियों को स्वच्छता बनाए रखने का संदेश दिया।
मंत्री के इस कदम को लोगों ने सराहा। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को केवल निर्देश देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जरूरत पड़ने पर खुद उदाहरण भी पेश करना चाहिए। लोगों ने मंत्री के इस व्यवहार को स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला कदम बताया।
भारत में स्वच्छता को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकारें सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई बनाए रखने के लिए कई योजनाएं और जागरूकता कार्यक्रम संचालित कर रही हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर सफाई व्यवस्था में लापरवाही की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
मंत्री ने सफाई करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि स्वच्छता केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सरकारी भवनों और सार्वजनिक सुविधाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस घटना के बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों को भी व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने साफ कहा कि जनता से जुड़ी सुविधाओं में किसी भी तरह की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्सर सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर सफाई की समस्या देखने को मिलती है। ऐसे में यदि अधिकारी और जनप्रतिनिधि समय-समय पर निरीक्षण करें तो व्यवस्था में सुधार आ सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नेताओं का इस तरह जनता के बीच जाकर काम करना एक सकारात्मक संदेश देता है। इससे लोगों में भी स्वच्छता को लेकर जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है।
हालांकि कुछ लोगों ने यह भी कहा कि केवल एक दिन सफाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरी है कि स्थायी व्यवस्था बनाई जाए और नियमित रूप से निगरानी की जाए ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
फिलहाल मंत्री के इस कदम की चर्चा पूरे राज्य में हो रही है। गंदगी देखकर नाराज होने और खुद सफाई करने का उनका तरीका लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घटना ने एक बार फिर स्वच्छता और सार्वजनिक सुविधाओं की गुणवत्ता को लेकर बहस शुरू कर दी है।