Hyderabad हैदराबाद। शहर के मछली पकड़ने के शौकीन (anglers) अब अपने पुराने शौक को जारी रखने को लेकर असमंजस में हैं। वजह है—शहर के बाहरी इलाकों में जलाशयों और झीलों पर पुलिस की बढ़ती कार्रवाई। वर्षों से अपनी डोर, कांटा और बांस लेकर निकलने वाले ये शौकीन अब पुलिस की रोक-टोक के कारण मछली पकड़ने नहीं जा पा रहे हैं। करीब एक साल से पुलिस ने झीलों और जलाशयों में इनके प्रवेश पर सख्ती बढ़ा दी है। कई बार पुलिस इन्हें मौके पर ही चेतावनी देकर छोड़ देती है, जबकि कई बार घंटों थाने में बैठाकर ‘पेटी केस’ (petty cases) दर्ज कर दिए जाते हैं। हाशमाबाद निवासी मुस्तफा कादरी बताते हैं, “पिछली बार जब मैं शमशाबाद झील पर गया था तो पुलिस ने पकड़ लिया। हमें थाने ले जाकर मीडिया के सामने पेश किया गया और चेतावनी देकर छोड़ दिया। परिवार डर गया और कहा कि अब मछली पकड़ने मत जाना। अब मैं कर्नाटक तक जाता हूं इस शौक के लिए। 

कई अन्य मछुआरे भी इसी परेशानी से जूझ रहे हैं। कलापतर निवासी मोहम्मद हाजी कहते हैं, “पुलिस कार्रवाई के डर से हम अब शहर से 100 से 300 किलोमीटर दूर झीलों में जाते हैं। दशकों से जो शौक पाला है, वो आसानी से खत्म नहीं होगा। चारमीनार के लाल बाजार में 1950 के दशक में स्थापित दो दुकानों से इस शौक के पुराने इतिहास का अंदाजा लगाया जा सकता है। मोहम्मद इम्तियाज, जो ‘Mohammed Siddiq Fishing Articles’ नाम की दुकान चलाते हैं, बताते हैं, “मेरे पूर्वजों ने 1954 में यह दुकान खोली थी। आज भी लोग हफ्ते के आखिर में मछली पकड़ने जाने से पहले हमारे यहां से कांटे और लाइन खरीदने आते हैं। हालांकि, ऑनलाइन बिक्री बढ़ने से व्यापार में कमी आई है। 

डाइअमंड एंग्लर हब के सैयद अज़हर हुसैन बताते हैं, “ऑनलाइन विकल्प आने से बिक्री कुछ घटी है, लेकिन हमारे नियमित ग्राहक अब भी आते हैं। अब फाइबरग्लास और कार्बन फाइबर की रॉड सबसे लोकप्रिय हैं। मार्केट में एक आधुनिक मछली पकड़ने की रॉड 500 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक की मिलती है, जबकि पारंपरिक लकड़ी की रॉड 100 से 150 रुपये में उपलब्ध है। ब्रांडेड रॉड की कीमतें इससे कहीं अधिक हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि ये कार्रवाई सुरक्षा कारणों से की जा रही है। एक उपनगर के पुलिस निरीक्षक ने बताया, “कई बार लोग झीलों में डूब जाते हैं। इसके अलावा, कुछ लोग नशे में झील के किनारे आकर झगड़े भी करते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ती है। इसलिए हमें सख्ती बरतनी पड़ती है।”
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