24 मीटर से ज़्यादा ऊँची इमारतों के लिए फ़ायर सेफ़्टी प्रोटोकॉल अनिवार्य हैं
हैदराबाद: 24 मीटर या उससे ज़्यादा ऊँची इमारतों के लिए 'फायर टॉवर' ज़रूरी है, चाहे वे रिहायशी हों, कमर्शियल हों या सेमी-कमर्शियल। इसके अलावा, फायर सर्विस डिपार्टमेंट के नए नियमों के मुताबिक, ऐसी इमारतों के लिए 'फायर कमांड सेंटर' (FCC) भी ज़रूरी है।
नई गाइडलाइंस के मुताबिक, बेसमेंट के कमरों में डीज़ल जनरेटर रखने की इजाज़त होगी, बशर्ते दीवार की 'फायर रेजिस्टेंस रेटिंग' दो घंटे की हो। ऐसी जगहों पर 'लूवर्स' (खड़ी पट्टियाँ) लगाना ज़रूरी है।
गाइडलाइंस के मुताबिक, 24 मीटर से कम ऊँची इमारतों के लिए अब 'फायर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) की ज़रूरत नहीं है। पुराने नियमों के तहत, 15 मीटर से ज़्यादा ऊँची कमर्शियल इमारतों और 18 मीटर से ज़्यादा ऊँची रिहायशी इमारतों के लिए NOC ज़रूरी थी।
तेलंगाना फायर, डिज़ास्टर रिस्पॉन्स, इमरजेंसी और सिविल डिफेंस डिपार्टमेंट के मुताबिक, इन बदले हुए नियमों का मकसद प्रोविज़नल फायर NOC के लिए एप्लीकेशन प्रोसेस करते समय आग और सुरक्षा उपायों को लागू करने का एक साफ़, एक जैसा और प्रैक्टिकल तरीका अपनाना था।
7 अक्टूबर से लागू हुए ये नए नियम सिर्फ़ नई एप्लीकेशन पर ही लागू होंगे। सरकार के इस ऐलान के बाद नियमों में बदलाव किया गया कि अगर किसी इमारत की ऊँचाई 21 मीटर (लगभग छह मंज़िल) से ज़्यादा है, तो उसे 'हाई-राइज़' (ऊँची इमारत) माना जाएगा; पहले यह सीमा 18 मीटर (पाँच मंज़िल) थी।
फायर सर्विस के डायरेक्टर-जनरल विक्रम सिंह मान ने बड़ी बिल्डर एसोसिएशनों - कन्फेडरेशन ऑफ़ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (CREDAI), नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) और तेलंगाना बिल्डर्स फेडरेशन - के प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद इमारतों के लिए ये नए नियम जारी किए।
फायर अधिकारियों के मुताबिक, इन बदले हुए नियमों का मकसद फायर NOC प्रोसेस को आसान बनाना, नियमों का पालन करना आसान करना और इमारतों में आग से सुरक्षा के उपायों को असरदार ढंग से लागू करना था।