हैदराबाद: तेलंगाना हाई कोर्ट ने मेडक ज़िले के तेल्लापुर गाँव में 92.39 एकड़ ज़मीन के अधिग्रहण की कार्यवाही को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने माना कि अधिग्रहण का नोटिफ़िकेशन अस्पष्ट था, धारा 5-A के तहत जाँच सिर्फ़ एक औपचारिकता बनकर रह गई थी और आंध्र प्रदेश शहरी क्षेत्र (विकास) अधिनियम, 1975 की धारा 18 के तहत ज़रूरी शर्तों का पालन नहीं किया गया था।
जस्टिस वाकिटी रामकृष्ण रेड्डी ने छह रिट याचिकाओं को मंज़ूरी दी। इन याचिकाओं में ज़मीन अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 4(1) के तहत 22 फ़रवरी 2006 को जारी नोटिफ़िकेशन और धारा 6 के तहत 3 फ़रवरी 2007 को जारी घोषणा को चुनौती दी गई थी। सर्वे नंबर 333, 334, 335, 341, 342, 343, 363, 364 और 368 वाली ज़मीनों को एक टाउनशिप बनाने के लिए अधिग्रहित करने का प्रस्ताव था।
कोर्ट ने पाया कि इसी ज़मीन के एक हिस्से से जुड़े अधिग्रहण को पहले ही फ़रवरी में रद्द किया जा चुका था। कोर्ट ने माना कि प्रतिवादी बाकी ज़मीन मालिकों के मामले में अलग नज़रिया अपनाने का कोई आधार साबित नहीं कर पाए।
कोर्ट ने पाया कि "टाउनशिप का विकास और भविष्य की परियोजनाएँ" जैसे शब्द इतने स्पष्ट नहीं थे कि ज़मीन मालिक धारा 5-A के तहत आपत्ति जताने के अपने कानूनी अधिकार का ठीक से इस्तेमाल कर सकें। कोर्ट ने यह भी माना कि जाँच में आपत्तियों पर सार्थक रूप से विचार नहीं किया गया; इसमें ज़मीन का इतिहास, उसका कन्वर्ज़न और पहले अधिग्रहण से उसे हटाए जाने जैसी बातें शामिल थीं।