एमवीएसआर इंजीनियरिंग कॉलेज डांडिया नाइट में घातक दुर्घटना से सुरक्षा और अनुमति विवाद छिड़ गया
हैदराबाद: नादेरगुल स्थित MVSR इंजीनियरिंग कॉलेज में शनिवार को 'डांडिया नाइट' के दौरान लाइटिंग का एक ढांचा (स्ट्रक्चर) गिर गया, जिससे छात्र दहशत में आ गए। इस हादसे में कुछ छात्रों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। छात्रों का आरोप है कि 80 फुट का यह ढांचा बिना किसी उचित सहारे (सपोर्ट) के खड़ा किया गया था। इससे सुरक्षा इंतजामों, वेंडर के चयन और कार्यक्रम के लिए ली गई अनुमतियों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह कार्यक्रम 'संगम 2026' (Sangamam 2026) का हिस्सा था, जो दो दिनों तक चलने वाला एक तकनीकी और सांस्कृतिक उत्सव था और शनिवार को संपन्न हुआ। छात्रों के बीच बांटे गए प्रचार सामग्री में इसे MVSR का पहला 'डांडिया इवेंट' बताया गया था और छात्रों से इसमें शामिल होकर इसे सफल बनाने की अपील की गई थी। इस उत्सव के आयोजन में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) विभाग शामिल था।
'संगम 2026' आयोजन समिति ने शनिवार को शाम 5 बजे से 7:30 बजे तक कॉलेज के खेल के मैदान में 'डांडिया नाइट' रखी थी। रात 7:45 बजे कॉलेज की छह बसें उपलब्ध थीं, जिनसे ज्यादातर छात्र वापस चले गए।
एक छात्र ने बताया कि 'अर्ली-बर्ड' पास की कीमत ₹299 थी, जबकि सामान्य पास ₹350 में मिल रहे थे। छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों से ₹300 प्रति व्यक्ति के हिसाब से पैसे लिए गए थे और कुल जमा राशि लगभग ₹6 लाख थी।
छात्र का आरोप है कि CSE विभाग ने शुरुआत में एक वेंडर के लिए ₹3 लाख तय किए थे, लेकिन बाद में कॉलेज प्रबंधन ने एक सस्ता वेंडर चुन लिया। छात्र ने ₹2.5 लाख की एक और रकम का जिक्र किया, हालांकि प्रबंधन ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
लाइटिंग स्ट्रक्चर को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्र का दावा है कि लगभग 80 फुट का यह ढांचा बिना किसी साफ दिखने वाले सहारे के खड़ा था। शहर के एक लाइट टेक्नीशियन मन्नान ने बताया कि अस्थायी लाइटिंग स्ट्रक्चर के लिए सही डिजाइन और स्थिरता के उपाय जरूरी होते हैं। इसमें ढांचे की बनावट, उस पर पड़ने वाले भार और जगह की स्थिति के हिसाब से एंकरिंग या वजन (बैलास्ट) का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "यह पता लगाने के लिए कि क्या इसमें कोई लापरवाही बरती गई है, ढांचे के डिजाइन, उसे लगाने के तरीके और सुरक्षा नियमों के पालन की जांच होनी चाहिए।"
छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर पहुंची मीरपेट पुलिस को पता चला कि इस कार्यक्रम के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। छात्रों ने बताया कि हादसे के बाद उन्हें कॉलेज की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली—न तो आधिकारिक समूहों के जरिए और न ही व्यक्तिगत रूप से। जानकारी न मिलने की वजह से छात्रों की चिंता और बढ़ गई।
हालात तनावपूर्ण बने रहे, इस बीच छात्र नेता और कुछ अन्य लोग कॉलेज परिसर में घुस गए। कुछ लोगों ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, जबकि पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी रही। 'संगमम' के संयोजक डॉ. राजेश एच. कुलकर्णी और सह-संयोजक डॉ. अखिल खरे ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। कार्यक्रम के समन्वयक शिव प्रसाद ने भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।