कपास सीजन शुरू होने से पहले संकट: एमएसपी से नीचे लुढ़के भाव, 6 लाख किसान चिंतित
hyederabad हैदराबाद: तेलंगाना में 2025-26 का कपास विपणन सीजन मध्य अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है, लेकिन इससे पहले ही राज्य के किसानों में बेचैनी बढ़ गई है। कारण यह है कि मंडियों में मिल रहे भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी नीचे हैं। इससे सरकारी खरीद केंद्रों पर भारी भीड़, भुगतान में देरी और प्रसंस्करण की समस्याओं की आशंका जताई जा रही है। राज्य के वारणगल, आदिलाबाद, नलगोंडा और अन्य जिलों में करीब 6 लाख किसान इस बार कपास बेचने के लिए मंडियों और सरकारी केंद्रों का रुख करेंगे। लेकिन फिलहाल मंडी भाव किसानों के लिए निराशाजनक हैं। जमीकुंटा और भैंसा जैसी मंडियों में कपास का भाव 6,333 रुपये से 6,805 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किया जा रहा है। यह दरें एमएसपी से 1,435 रुपये तक कम हैं। मध्यम लंबाई वाले कपास के लिए इस बार एमएसपी 7,710 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले साल से 8.27 प्रतिशत अधिक है। वहीं, लंबी किस्म के कपास के लिए एमएसपी 8,110 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। इसके बावजूद बाजार में इन किस्मों के भाव काफी कम चल रहे हैं, जिससे किसानों को नुकसान की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौजूदा स्थिति बनी रही तो सरकारी खरीद केंद्रों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। किसानों को समय पर भुगतान न मिलना, तुलाई में देरी और परिवहन में रुकावट जैसी समस्याएँ सामने आ सकती हैं। कपास की उपज पर निर्भर छोटे और मध्यम किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। तेलंगाना सरकार ने पहले ही संकेत दिए हैं कि केंद्र सरकार से अतिरिक्त खरीद सुनिश्चित करने की मांग की जाएगी। लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि केवल एमएसपी बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक कि मंडी स्तर पर प्रभावी खरीद व्यवस्था और समय पर भुगतान की गारंटी नहीं दी जाती। राज्य में कपास एक प्रमुख नकदी फसल है और लाखों किसान इसके उत्पादन पर निर्भर हैं। ऐसे में एमएसपी और बाजार भाव के बीच बढ़ती खाई आने वाले दिनों में बड़े कृषि संकट का रूप ले सकती है।