Hyderabad: बच्चों की दवाओं को लेकर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय कफ सिरप के उपयोग पर सख्त नियम लागू करने पर विचार कर रहा है। प्रस्तावित दिशा-निर्देशों में छोटे बच्चों के लिए दवाओं के उपयोग को सीमित करने और चिकित्सकीय निगरानी को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
यह प्रस्ताव Indian Pharmacopoeia Commission द्वारा तैयार किए गए नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया 2026 के ड्राफ्ट का हिस्सा है, जिसमें बच्चों के लिए खांसी और सर्दी की दवाओं के सुरक्षित उपयोग से जुड़े नियमों को स्पष्ट किया गया है।
ड्राफ्ट के अनुसार, दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाएं देने की सिफारिश नहीं की जाएगी और इस उम्र वर्ग में इन दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन पर रोक लगाने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में भी इन दवाओं के उपयोग को सामान्य रूप से सीमित रखने का प्रस्ताव है।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि यदि पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों को इन दवाओं की आवश्यकता होती है, तो उनका उपयोग केवल सावधानीपूर्वक क्लिनिकल जांच के बाद ही किया जाना चाहिए। इसके अलावा, दवाओं के डोज़ को सख्ती से नियंत्रित करने और मल्टी-ड्रग कॉम्बिनेशन से बचने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बच्चों में कफ सिरप के अनियंत्रित उपयोग से गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं, इसलिए इस पर सख्त नियंत्रण जरूरी है। हाल के वर्षों में कई मामलों में बच्चों की दवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है, जिसके बाद यह प्रस्ताव सामने आया है।
ड्राफ्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बच्चों को दी जाने वाली किसी भी खांसी या सर्दी की दवा को केवल डॉक्टर की सलाह और निगरानी में ही दिया जाना चाहिए। इससे अनावश्यक जोखिमों को कम किया जा सकेगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का उद्देश्य बच्चों की दवा सुरक्षा को मजबूत करना और दवा उपयोग में वैज्ञानिक मानकों को लागू करना बताया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर आगे विशेषज्ञों की राय ली जाएगी और उसके बाद अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
कुल मिलाकर, बच्चों के लिए कफ सिरप के उपयोग पर प्रस्तावित सख्त नियम दवा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं, जिससे छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।