हैदराबाद। तेलंगाना की राजनीति में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (BRS) के बीच टकराव तेज हो गया है। BRS विधायक दल के व्हिप और कुथबुल्लापुर से विधायक केपी विवेकानंद ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की सरकार पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को BRS की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय देते हुए चेतावनी दी कि जवाब नहीं मिलने पर पार्टी सीधा आंदोलन शुरू करेगी।
तेलंगाना भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विवेकानंद ने कहा कि BRS लगातार राज्य सरकार के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दे उठा रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने हजारों करोड़ रुपये से जुड़े कई मामलों पर सवाल खड़े किए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से इन आरोपों पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। विवेकानंद ने मुख्यमंत्री की कथित चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उनसे सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
BRS विधायक ने आरोप लगाया कि रेवंत रेड्डी के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष होने के नाते उनकी पार्टी इन मुद्दों को लगातार जनता के सामने उठा रही है और सरकार से जवाब मांग रही है। हालांकि ये BRS और विवेकानंद की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
विवेकानंद ने मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों को लेकर भी आरोप लगाए। उनका दावा है कि मुख्यमंत्री से जुड़े कुछ पारिवारिक सदस्य कथित तौर पर गैर-संवैधानिक शक्ति केंद्र की तरह काम कर रहे हैं और अपने हितों के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन आरोपों पर मुख्यमंत्री या उनके परिवार की ओर से इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के संदर्भ में विस्तृत जवाब सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
हाल के दिनों में BRS के अन्य नेताओं ने भी मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े कारोबारी हितों और संपत्तियों को लेकर सवाल उठाए हैं। BRS नेता मन्ने कृषांक ने एक दिन पहले मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े कथित कारोबारी हितों, निवेश और वित्तीय लेनदेन की प्रवर्तन निदेशालय से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी। ये भी विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं।
केपी विवेकानंद ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि सरकार अगर खुद को पारदर्शी बताती है तो उसे विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने इसके लिए 24 घंटे की समयसीमा तय की। उनका कहना है कि निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं मिलने पर BRS सरकार के खिलाफ प्रत्यक्ष आंदोलन की रणनीति अपनाएगी।
विवेकानंद इससे पहले भी रेवंत रेड्डी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते रहे हैं। सितंबर 2026 में उन्होंने कांग्रेस सरकार के 1,000 दिनों के कामकाज पर श्वेतपत्र जारी करने की चुनौती दी थी और विधानसभा में इस पर विस्तृत बहस की मांग की थी। उस समय भी उन्होंने सरकार पर कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं के आरोप लगाए थे।
दूसरी तरफ कांग्रेस और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भी BRS पर लगातार पलटवार करते रहे हैं। सितंबर में तेलंगाना विधानसभा में मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव और उनके परिवार से जुड़ी जमीनों को लेकर आरोप लगाए थे और जांच की बात कही थी। इससे साफ है कि तेलंगाना में दोनों प्रमुख राजनीतिक पक्ष एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगा रहे हैं।
कांग्रेस के नेता भी BRS के आरोपों को खारिज करते रहे हैं। हाल ही में तेलंगाना सरकार के मंत्री कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी ने BRS पर सरकार के खिलाफ कथित दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया था। उन्होंने उलटे BRS नेतृत्व की संपत्तियों और पिछली सरकार के कामकाज को लेकर सवाल उठाए थे।
ऐसे में विवेकानंद का 24 घंटे का अल्टीमेटम तेलंगाना में पहले से जारी राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है। BRS ने साफ कर दिया है कि वह भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाने की तैयारी में है। पार्टी ने मुख्यमंत्री से केवल सामान्य प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उसके द्वारा उठाए गए आरोपों पर स्पष्ट जवाब की मांग की है।
फिलहाल BRS द्वारा लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना जरूरी है। इन पर किसी न्यायिक या जांच एजेंसी के अंतिम निष्कर्ष का उल्लेख सामने नहीं आया है। वहीं मुख्यमंत्री और कांग्रेस की प्रतिक्रिया आने के बाद ही इन दावों पर सरकार का विस्तृत पक्ष स्पष्ट हो सकेगा।
BRS की चेतावनी के मुताबिक, मुख्यमंत्री की ओर से 24 घंटे में जवाब नहीं मिलने की स्थिति में पार्टी आंदोलन का रास्ता अपना सकती है। इससे आने वाले दिनों में तेलंगाना की राजनीति में सरकार और मुख्य विपक्षी दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के संकेत हैं।