चेन्नई : तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने थलपति विजय की एंट्री के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। द्रविड़ राजनीति की पुरानी ताकत मानी जाने वाली डीएमके अब अपनी संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने और पार्टी में नई ऊर्जा भरने की कोशिश में जुट गई है। इसी रणनीति के तहत पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन ने संगठन में बड़े बदलावों का ऐलान किया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति में नई चुनौती खड़ी कर दी है। विजय की लोकप्रियता, युवाओं में उनकी पकड़ और फिल्मी छवि को देखते हुए डीएमके अब संगठन को और मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।
डीएमके में बड़ा संगठनात्मक बदलाव
एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके ने पार्टी ढांचे में कई बड़े बदलावों का फैसला किया है। इनमें पदाधिकारियों के लिए उम्र सीमा, एक ही पद पर कार्यकाल की सीमा और संगठनात्मक जिलों की संख्या बढ़ाने जैसे फैसले शामिल हैं।
पार्टी ने संगठनात्मक जिलों की संख्या बढ़ाकर 78 से 110 करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर पार्टी की पहुंच बढ़ाना और कार्यकर्ताओं को ज्यादा सक्रिय भूमिका देना है।
इसके अलावा पार्टी पदों पर लंबे समय से बने रहने वाले नेताओं की जगह नए चेहरों को आगे बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है। इसे डीएमके में पीढ़ी परिवर्तन की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
विजय की बढ़ती लोकप्रियता बनी चुनौती
थलपति विजय ने राजनीति में कदम रखकर तमिलनाडु की सियासत में बड़ा बदलाव ला दिया है। उनकी पार्टी TVK को युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं के बीच समर्थन मिलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
विजय लंबे समय तक तमिल सिनेमा के सुपरस्टार रहे हैं। उनकी लोकप्रियता का बड़ा आधार युवा वर्ग और उनके प्रशंसकों का विशाल नेटवर्क है। यही वजह है कि डीएमके और अन्य पारंपरिक दल उनकी राजनीतिक रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।
स्टालिन ने युवाओं पर लगाया दांव
डीएमके की नई रणनीति में युवाओं को संगठन से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पार्टी चाहती है कि नए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर भविष्य के लिए मजबूत टीम तैयार की जाए।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, विजय की राजनीति का सबसे बड़ा प्रभाव युवाओं के बीच दिखाई दे सकता है। इसलिए डीएमके भी युवा नेतृत्व और आधुनिक संगठनात्मक ढांचे पर जोर दे रही है।
विधानसभा में भी बढ़ा टकराव
विजय और डीएमके के बीच राजनीतिक टकराव अब विधानसभा तक पहुंच चुका है। एमके स्टालिन ने विजय की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह विधानसभा को फिल्मी मंच की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और भाषणों में केवल प्रभाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं विजय समर्थकों का कहना है कि वह जनता से सीधे जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं और उनकी शैली को जनता पसंद करती है।
डीएमके की पुरानी पकड़ बचाने की कोशिश
तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके का लंबा इतिहास रहा है। पार्टी ने दशकों से राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन नई राजनीतिक ताकतों के उभरने के बाद पार्टी के सामने अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती है।
स्टालिन की कोशिश है कि पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत रखा जाए और नए मतदाताओं को भी जोड़ा जाए।
उदयनिधि स्टालिन की भूमिका
डीएमके में उदयनिधि स्टालिन को भी भविष्य के नेतृत्व के तौर पर देखा जाता है। वह लगातार विजय और TVK पर राजनीतिक हमले कर रहे हैं। उन्होंने विजय सरकार पर कई मुद्दों को लेकर सवाल उठाए हैं और डीएमके की नीतियों का बचाव किया है।
युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाना डीएमके की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
क्या विजय बदल देंगे तमिलनाडु की राजनीति?
तमिलनाडु में फिल्मी सितारों का राजनीति में प्रभाव पुराना रहा है। एमजी रामचंद्रन और जयललिता जैसे नेताओं ने सिनेमा से राजनीति तक सफल सफर तय किया था।
अब विजय उसी परंपरा को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करना है कि वह केवल लोकप्रिय अभिनेता नहीं बल्कि एक मजबूत राजनीतिक नेता भी हैं।
आगे की लड़ाई दिलचस्प होगी
डीएमके जहां संगठन मजबूत करने और पुराने आधार को बचाने की कोशिश कर रही है, वहीं विजय अपनी नई राजनीतिक पहचान बनाने में जुटे हैं।
स्टालिन के संगठनात्मक बदलाव को विजय की चुनौती का जवाब माना जा रहा है। आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और TVK के बीच मुकाबला और तेज होने की संभावना है।