रामेश्वरम/मन्नार : भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सीमा पर एक बार फिर तनाव की स्थिति देखने को मिली है। श्रीलंकाई नौसेना ने समुद्री सीमा पार कर मछली पकड़ने के आरोप में तमिलनाडु के रामेश्वरम के 9 भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद सभी मछुआरों को श्रीलंका के मन्नार न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 6 अगस्त तक न्यायिक हिरासत (रिमांड) में भेजने का आदेश दिया। इस घटना से रामेश्वरम और आसपास के तटीय क्षेत्रों में चिंता और नाराज़गी का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, रामनाथपुरम ज़िले के रामेश्वरम से 400 हॉर्सपावर वाली आधुनिक मशीनीकृत नौकाओं पर सवार 2,500 से अधिक मछुआरे मत्स्य विभाग से आवश्यक अनुमति लेने के बाद बुधवार सुबह समुद्र में मछली पकड़ने के लिए रवाना हुए थे। मछुआरे नियमित रूप से पाल्क जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में मछली पकड़ने जाते हैं। इसी दौरान कुछ नौकाएं कथित रूप से अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) के निकट पहुंच गईं, जहां श्रीलंकाई नौसेना ने कार्रवाई करते हुए 9 मछुआरों को हिरासत में ले लिया।
बताया जा रहा है कि श्रीलंकाई नौसेना ने आरोप लगाया कि भारतीय मछुआरे श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश कर मछली पकड़ रहे थे। इसके बाद नौसेना के जवानों ने संबंधित नौका को रोककर उसमें सवार सभी नौ मछुआरों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार मछुआरों को पूछताछ के बाद मन्नार ले जाया गया और फिर अदालत में पेश किया गया।
मन्नार कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी मछुआरों को 6 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अदालत के आदेश के बाद उन्हें स्थानीय जेल में भेज दिया गया है। इस बीच भारतीय अधिकारियों और तमिलनाडु सरकार ने मछुआरों की सुरक्षित रिहाई के लिए आवश्यक कूटनीतिक प्रयास शुरू कर दिए हैं।
रामेश्वरम के मछुआरा संगठनों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उनका कहना है कि समुद्र में मछली पकड़ने के दौरान कई बार समुद्री सीमा का सटीक निर्धारण करना कठिन हो जाता है, क्योंकि समुद्र में कोई स्पष्ट सीमा रेखा दिखाई नहीं देती। मछुआरों का कहना है कि वे जानबूझकर किसी दूसरे देश की सीमा में प्रवेश नहीं करते, बल्कि समुद्र की परिस्थितियों और मछलियों की उपलब्धता के कारण कई बार सीमा के निकट पहुंच जाते हैं।
मछुआरा संघों ने केंद्र और तमिलनाडु सरकार से मांग की है कि गिरफ्तार मछुआरों की जल्द रिहाई सुनिश्चित की जाए और इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भारत और श्रीलंका के बीच स्थायी समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि हर कुछ महीनों में भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी और नौकाओं की जब्ती की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होती है।
रामेश्वरम के तटीय इलाकों में मछली पकड़ना हजारों परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में मछुआरों की गिरफ्तारी से उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो जाता है। कई परिवारों ने सरकार से अपील की है कि उनके परिजनों को जल्द से जल्द रिहा कराया जाए ताकि वे सुरक्षित अपने घर लौट सकें।
गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका के बीच पाल्क जलडमरूमध्य में समुद्री सीमा को लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है। श्रीलंकाई नौसेना समय-समय पर भारतीय मछुआरों को समुद्री सीमा पार करने के आरोप में गिरफ्तार करती रही है। वहीं भारतीय पक्ष का कहना है कि पारंपरिक रूप से तमिलनाडु के मछुआरे इन समुद्री क्षेत्रों में वर्षों से मछली पकड़ते रहे हैं और मानवीय आधार पर उनके साथ नरमी बरती जानी चाहिए।
केंद्र सरकार भी कई बार श्रीलंका के समक्ष इस मुद्दे को राजनयिक स्तर पर उठा चुकी है। दोनों देशों के बीच संयुक्त कार्य समूह और उच्चस्तरीय बैठकों में मछुआरों के मुद्दे पर चर्चा होती रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री संसाधनों के साझा उपयोग, आधुनिक नेविगेशन प्रणाली के व्यापक इस्तेमाल और दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
फिलहाल, गिरफ्तार किए गए नौ भारतीय मछुआरों की रिहाई को लेकर उनके परिवारों की निगाहें भारत और श्रीलंका के बीच चल रहे कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं। मछुआरा संगठनों को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच बातचीत के माध्यम से जल्द सकारात्मक समाधान निकलेगा और सभी मछुआरे सुरक्षित अपने घर लौट सकेंगे। इस घटना ने एक बार फिर भारत-श्रीलंका समुद्री सीमा विवाद और मछुआरों की सुरक्षा के मुद्दे को प्रमुखता से सामने ला दिया है।