नीलगिरि। तमिलनाडु के नीलगिरि जिले में इस महीने दो लोगों की जान लेने वाले संदिग्ध आदमखोर बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने अभियान तेज कर दिया है। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने और उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए विभाग ने आधुनिक तकनीक के साथ बड़ी संख्या में वनकर्मियों को अभियान में लगाया है।
एक वन अधिकारी के मुताबिक, बाघ की तलाश के लिए तीन थर्मल ड्रोन तैनात किए गए हैं। इसके अलावा जंगल और आसपास के संवेदनशील इलाकों में छह पिंजरे लगाए गए हैं। बाघ की आवाजाही और मौजूदगी का पता लगाने के लिए करीब 50 कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं। वन विभाग की टीमें इन उपकरणों से मिलने वाली जानकारी का लगातार विश्लेषण कर रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, बाघ की मौजूदगी से प्रभावित जंगल और उसके आसपास के क्षेत्रों में निगरानी अभियान लगातार जारी है। इसके लिए 80 से अधिक वनकर्मियों को दो विशेष टीमों में बांटा गया है। दोनों टीमें अलग-अलग इलाकों में तलाशी और निगरानी का काम कर रही हैं। वन विभाग का प्रयास है कि बाघ की गतिविधियों के बारे में अधिक से अधिक सटीक जानकारी जुटाई जाए, ताकि उसे जल्द पकड़ा जा सके।
इस अभियान में थर्मल ड्रोन को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। घने जंगल और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में किसी जंगली जानवर की तलाश करना आसान नहीं होता। ऐसे में थर्मल तकनीक से लैस ड्रोन संभावित क्षेत्रों में बाघ की मौजूदगी का पता लगाने में मदद कर सकते हैं। वन विभाग जंगल के उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दे रहा है जहां बाघ के होने की आशंका अधिक है।
इसके साथ ही छह पिंजरों को रणनीतिक स्थानों पर लगाया गया है। इन पिंजरों के जरिए बाघ को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
जिले के गुडालुर क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। वन अधिकारी देवराज ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे बाघ के पकड़े जाने तक बेहद सावधानी बरतें। उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि देर रात या सुबह-सुबह अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें।
अधिकारी ने लोगों से जंगल और उसके आसपास के इलाकों में अकेले जाने से बचने की भी अपील की है। वन विभाग का मानना है कि बाघ की गतिविधियों को देखते हुए फिलहाल अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। खासकर उन इलाकों में जहां बाघ की मौजूदगी के संकेत मिले हैं, वहां लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
इस महीने दो लोगों की मौत के बाद स्थानीय समुदाय में चिंता का माहौल है। ग्रामीण इलाकों में लोग बाघ की गतिविधियों को लेकर भयभीत हैं। वन विभाग की टीमें लोगों को सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश भी दे रही हैं और बाघ की तलाश के साथ-साथ संवेदनशील इलाकों पर नजर रख रही हैं।
बाघ की तलाश के दौरान कैमरा ट्रैप से मिलने वाली तस्वीरें और वीडियो भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। जंगल में अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए कैमरों के माध्यम से वन अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बाघ किस क्षेत्र में सक्रिय है और उसकी आवाजाही का पैटर्न क्या है। इससे पिंजरों और अन्य निगरानी संसाधनों को अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
वन विभाग की विशेष टीमें संभावित मार्गों और बाघ के गुजरने वाले इलाकों की निगरानी कर रही हैं। कर्मचारियों को अलग-अलग समूहों में तैनात कर जंगल के बड़े हिस्से की निगरानी की जा रही है। अभियान का उद्देश्य बाघ को बिना अनावश्यक जोखिम के नियंत्रित करना है।
अधिकारियों के मुताबिक, किसी बाघ को पकड़ने का अभियान बेहद सावधानी से चलाना पड़ता है। जंगल का भूगोल, घनी वनस्पति और बाघ की गतिविधियां अभियान को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। इसलिए वन विभाग आधुनिक उपकरणों के साथ अनुभवी कर्मचारियों की मदद ले रहा है।
स्थानीय लोगों से भी वन विभाग के साथ सहयोग करने की अपील की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को बाघ दिखाई देता है या उसकी गतिविधि से संबंधित कोई जानकारी मिलती है, तो वह खुद उसका पीछा करने या उसके करीब जाने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचित करे।
वन विभाग ने लोगों को अफवाहों से बचने की भी सलाह दी है। बाघ की मौजूदगी से जुड़ी अपुष्ट जानकारी लोगों में अनावश्यक भय पैदा कर सकती है और खोज अभियान भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए अधिकारियों ने लोगों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा है।
फिलहाल तीन थर्मल ड्रोन, छह पिंजरे और 50 कैमरा ट्रैप के साथ 80 से अधिक वनकर्मी अभियान में जुटे हुए हैं। जंगल और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी लगातार बढ़ाई जा रही है। वन विभाग की प्राथमिकता बाघ का जल्द पता लगाकर उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ना और प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
गुडालुर के वन अधिकारी देवराज ने स्पष्ट किया है कि जब तक बाघ पकड़ा नहीं जाता, तब तक लोगों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। देर रात और सुबह के समय बाहर निकलने से बचने की सलाह इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। वन विभाग की टीमें लगातार इलाके में मौजूद हैं और बाघ की तलाश जारी है।
दो लोगों की मौत के बाद शुरू हुआ यह अभियान अब बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है। आधुनिक तकनीक, कैमरा ट्रैप, पिंजरों और बड़ी संख्या में वनकर्मियों की तैनाती से विभाग को उम्मीद है कि संदिग्ध बाघ का जल्द पता लगाया जा सकेगा। तब तक नीलगिरि के प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता और सावधानी सबसे अहम बनी हुई है।