देश में दवाओं के खराब रिएक्शन की बढ़ती शिकायतें: FDC दवाओं पर विशेष ध्यान
Tamil Nadu तमिलनाडु: हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल के पहले 9 महीनों में देश भर से दवाओं के खराब रिएक्शन के 1,387 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में सबसे अधिक शिकायतें ‘फिक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन’ (FDC) दवाओं को लेकर मिली हैं। FDC दवाओं में दो या दो से अधिक ओरिजिनल दवाओं का संयोजन होता है और इनका प्रयोग विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है कि देश में बिकने वाली सभी तरह की दवाओं और टैबलेट्स की जांच सेंट्रल और स्टेट ड्रग कंट्रोल बोर्ड द्वारा नियमित रूप से की जाती है। इसके अलावा, नकली और गुणवत्ता में घटिया दवाओं का पता लगाया जाता है और उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाती है।
सेंट्रल ड्रग्स क्वालिटी कंट्रोल बोर्ड ने कुछ साल पहले राज्यों और मैन्युफैक्चरर्स को निर्देश दिए थे कि वे दवाओं और मेडिकल डिवाइस पर किसी भी तरह की खराब प्रतिक्रिया होने पर तुरंत रिपोर्ट करें। इसके लिए नियम भी बनाए गए थे, ताकि रोगियों को सुरक्षित दवा उपलब्ध कराई जा सके और किसी भी तरह के स्वास्थ्य जोखिम को रोका जा सके।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि FDC दवाओं में खराब प्रतिक्रिया की संख्या अधिक होने के कारण विशेषज्ञों ने डॉक्टरों और फार्मासिस्टों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। मरीजों को भी यह चेतावनी दी गई है कि दवा का सेवन हमेशा चिकित्सक की सलाह के अनुसार करें और किसी भी असामान्य प्रतिक्रिया को तुरंत स्वास्थ्य विशेषज्ञ को बताएं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि दवाओं की निगरानी और उनके प्रभाव की जांच स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी बताया कि खराब रिएक्शन की जानकारी जुटाने और उसका विश्लेषण करने से भविष्य में ऐसी दवाओं के उत्पादन और वितरण में सुधार किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि FDC दवाओं के लाभ और जोखिम का संतुलन ध्यान में रखकर ही इनके उत्पादन और वितरण की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने मैन्युफैक्चरर्स से अनुरोध किया है कि वे किसी भी संभावित जोखिम के मामले में तुरंत संबंधित बोर्ड को सूचित करें।
केंद्रीय और राज्य ड्रग कंट्रोल बोर्ड के निरीक्षण से यह सुनिश्चित किया जाता है कि बाजार में बिक रही दवाएं गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों। इसके साथ ही, नकली या घटिया दवाओं पर कानूनी कार्रवाई कर जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि देश में दवा सुरक्षा और निगरानी का काम निरंतर चल रहा है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस पर लगातार ध्यान दे रहे हैं ताकि लोगों को सुरक्षित और प्रभावी दवाएं उपलब्ध हो सकें।