IIT-M और स्पार्क मिंडा फाउंडेशन ने स्वदेशी कृत्रिम घुटने को स्केल करने के लिए हाथ मिलाया
चेन्नई: IIT मद्रास ने स्पार्क मिंडा फाउंडेशन (SMF) के साथ मिलकर अपने रिसर्चर्स द्वारा बनाए गए स्वदेशी प्रोस्थेटिक घुटने (कृत्रिम घुटने) को लैब से निकालकर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए तैयार करने का फैसला किया है। इससे अंग खो चुके लोगों, खासकर ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने-फिरने में आसानी होगी।
IIT मद्रास के टेक्नोलॉजी ट्रांसफर ऑफिस (TTO) और ऑटोमोटिव पार्ट्स बनाने वाली बड़ी कंपनी स्पार्क मिंडा की CSR शाखा, SMF ने 'कदम' (Kadam) नाम के एक नए प्रोस्थेटिक घुटने की टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर के लिए एक नॉन-एक्सक्लूसिव लाइसेंसिंग एग्रीमेंट पर साइन किए हैं।
इस एग्रीमेंट से IIT-M की असिस्टिव और रिहैबिलिटेशन टेक्नोलॉजी में रिसर्च और इंजीनियरिंग की विशेषज्ञता और SMF की प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और लोगों तक पहुँचने की क्षमताएँ एक साथ आ गई हैं। इस पार्टनरशिप का मकसद टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर पहुँचाना और ज़्यादा से ज़्यादा यूज़र्स के लिए प्रोस्थेटिक समाधान उपलब्ध कराना है।
'कदम' को IIT मद्रास में नेशनल सेंटर फॉर असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजीज़ (NCAHT) और TTK सेंटर फॉर रिहैबिलिटेशन रिसर्च एंड डिवाइस डेवलपमेंट (R2D2) की हेड, प्रोफ़ेसर सुजाता श्रीनिवासन की देखरेख में विकसित किया गया था।
इस मौके पर प्रोफ़ेसर श्रीनिवासन ने कहा कि संस्थान को ऐसे पार्टनर्स के साथ काम करके खुशी हो रही है जो मानते हैं कि दिव्यांग लोगों को ऐसी टेक्नोलॉजी मिलनी चाहिए जिससे वे ज़्यादा आज़ाद होकर जी सकें।
यह पार्टनरशिप SMF की उस बड़ी पहल का हिस्सा है जिसके तहत स्वदेशी प्रोस्थेटिक समाधान विकसित किए जा रहे हैं और 2030 तक 50,000 प्रोस्थेटिक अंग लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
स्पार्क मिंडा ग्रुप के ग्रुप CTO और स्पार्क मिंडा टेक्निकल सेंटर के CEO, डॉ. सुरेश डी. ने कहा कि संगठन टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का इस्तेमाल करके ऐसे समाधान विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है जो सामाजिक विकास में योगदान दें।
SMF की चेयरपर्सन सारिका मिंडा ने कहा कि लाइसेंसिंग एग्रीमेंट एक ऐसे इकोसिस्टम को बनाने की दिशा में एक कदम है जहाँ एकेडमिक इनोवेशन, इंडस्ट्री की क्षमताएँ और सामाजिक ज़िम्मेदारी मिलकर एक ज़्यादा समावेशी समाज के लिए समाधान विकसित कर सकें।