धर्मपुरी। तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में रविवार सुबह एक बड़ा रेल हादसा टल गया। मुथांपट्टी के पास भूस्खलन के कारण रेलवे ट्रैक पर गिरा एक बड़ा पत्थर नागरकोइल-बेंगलुरु एक्सप्रेस ट्रेन से टकरा गया। हालांकि लोको पायलटों की सतर्कता और समय पर उठाए गए कदमों के कारण ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त होने से बच गई।

घटना के बाद रेलवे अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही रेलवे की टीमें मौके पर पहुंचीं और ट्रैक की जांच शुरू की गई। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है।

जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह नागरकोइल से बेंगलुरु जा रही एक्सप्रेस ट्रेन धर्मपुरी जिले के मुथांपट्टी सेक्शन से गुजर रही थी। इसी दौरान पास के पहाड़ी क्षेत्र में अचानक भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से मिट्टी, पत्थर और चट्टानें खिसककर रेलवे ट्रैक पर आ गईं।

इसी दौरान एक बड़ा पत्थर चलती हुई ट्रेन से टकरा गया। अचानक सामने आए खतरे को देखते हुए लोको पायलटों ने तुरंत स्थिति को समझा और आवश्यक कदम उठाए। उनकी सतर्कता के कारण ट्रेन पटरी से उतरने से बच गई।

भूस्खलन से ट्रैक पर आया मलबा

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्र में मिट्टी कमजोर होने के कारण भूस्खलन हुआ। इसके चलते पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा रेलवे लाइन पर आ गया था।

रेलवे ट्रैक पर पत्थर और चट्टानें गिरना बेहद खतरनाक स्थिति होती है, क्योंकि तेज गति से चल रही ट्रेन के सामने अचानक बाधा आने पर बड़ा हादसा हो सकता है। लेकिन इस मामले में लोको पायलटों ने समय रहते खतरे को भांप लिया।

लोको पायलटों की सतर्कता से बची जानें

रेलवे अधिकारियों ने लोको पायलटों की सूझबूझ की सराहना की है। बताया गया कि ट्रेन संचालन के दौरान उनकी सतर्क निगाहों और सही समय पर लिए गए फैसले से बड़ा हादसा टल गया।

रेलवे में लोको पायलटों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी आपात स्थिति में उनकी त्वरित प्रतिक्रिया यात्रियों की सुरक्षा के लिए निर्णायक साबित होती है।

रेलवे टीम ने शुरू किया निरीक्षण

घटना की जानकारी मिलने के बाद रेलवे की तकनीकी टीमों को मौके पर भेजा गया। अधिकारियों ने रेलवे ट्रैक और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया।

रेलवे की ओर से यह सुनिश्चित किया गया कि ट्रैक सुरक्षित है और ट्रेन संचालन में किसी तरह की परेशानी न हो। भूस्खलन के कारण प्रभावित हिस्से को साफ करने और सुरक्षा जांच का काम किया गया।

यात्रियों में मचा था डर

ट्रेन से पत्थर टकराने की घटना के बाद यात्रियों में कुछ समय के लिए डर का माहौल बन गया। अचानक तेज आवाज आने और ट्रेन के रुकने से यात्री स्थिति को समझने की कोशिश करने लगे।

हालांकि रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों ने स्थिति संभाल ली। किसी यात्री को नुकसान नहीं पहुंचा और ट्रेन को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाया गया।

पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ा खतरा

बरसात के मौसम में पहाड़ी इलाकों से गुजरने वाली रेलवे लाइनों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। भारी बारिश के कारण चट्टानें कमजोर होकर गिर सकती हैं, जिससे रेल यातायात प्रभावित हो सकता है।

रेलवे ऐसे क्षेत्रों में नियमित निगरानी रखता है और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा उपाय किए जाते हैं। इसके बावजूद प्राकृतिक घटनाओं के कारण कई बार अचानक परिस्थितियां बन जाती हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर जोर

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ट्रैक की निगरानी, पेट्रोलिंग और तकनीकी जांच लगातार की जाती है, खासकर बारिश के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है।

धर्मपुरी की घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि रेल संचालन में कर्मचारियों की सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण होती है। समय पर लिया गया फैसला कई लोगों की जान बचा सकता है।

फिलहाल रेलवे की ओर से घटना की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि भूस्खलन की वजह क्या रही। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

बेंगलुरु एक्सप्रेस के साथ हुआ यह हादसा बड़ा नुकसान पहुंचा सकता था, लेकिन लोको पायलटों की समझदारी और रेलवे की त्वरित कार्रवाई से एक गंभीर दुर्घटना टल गई।

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