मद्रास हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति को बेदखल करने के RDO के आदेश को बरकरार रखा
चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी। इस व्यक्ति ने कोयंबटूर में अपनी बुजुर्ग माँ के घर से बेदखल करने के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी। कोर्ट ने कहा कि 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत रेवेन्यू डिविजनल ऑफिसर (RDO) को वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले उनके बच्चों या आश्रितों को बेदखल करने का आदेश देने का अधिकार है।
यह मामला के.एस. सुधाकर द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने अपनी माँ के स्वामित्व वाले घर से बेदखल करने के RDO के आदेश को चुनौती दी थी। परिवार के बंटवारे में, बुजुर्ग महिला और उनकी बेटी को घर का कुछ हिस्सा मिला था। हालाँकि, उनके बेटे सुधाकर ने उन्हें घर से निकाल दिया और उस पर कब्जा कर लिया। इसके बाद महिला ने संबंधित RDO के पास शिकायत दर्ज कराई, जिन्होंने सुधाकर को बेदखल करने का आदेश जारी किया। सुधाकर ने इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।
जस्टिस हेमंत चंदनगौडर ने बेदखली के आदेश में कोई कमी न पाते हुए याचिका खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता का संपत्ति पर अवैध कब्जा है क्योंकि संपत्ति को लेकर उनके द्वारा दायर सिविल मुकदमा खारिज कर दिया गया था।