चेन्नई: तमिलनाडु में खरीफ सीजन (अप्रैल-सितंबर) के दौरान धान की खेती का रकबा 28% कम हो गया है। यह 2025-26 में 17.5 लाख हेक्टेयर से घटकर इस साल 12.52 लाख हेक्टेयर रह गया है — यानी 4.98 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। इस भारी कमी की मुख्य वजह मेट्टूर बांध का देर से खुलना और कावेरी नदी में पानी का कम बहाव है।
हालांकि, कृषि विभाग को उम्मीद है कि रबी सीजन (अक्टूबर-मार्च) में खेती बढ़ाकर तमिलनाडु के सालाना अनाज उत्पादन लक्ष्य (125 लाख मीट्रिक टन) को हासिल कर लिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, इस लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
पूर्व कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एन. सुब्बैयान (जिनकी जगह पिछले शुक्रवार को एन. वेंकटेश ने ली) ने बताया कि सभी जिलों को फसल से जुड़ी आपातकालीन योजनाएं भेज दी गई हैं और उन पर अमल भी हो रहा है। सुब्बैयान ने कहा, "किसानों को धान की रोपाई के बजाय सीधे बुवाई (डायरेक्ट सोइंग) करने की सलाह दी गई है। इससे न सिर्फ पानी की जरूरत कम होती है, बल्कि उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश के दौरान फसल को होने वाले संभावित नुकसान से भी बचा जा सकता है।"