नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु के अगस्त्यमलाई इकोलॉजिकल लैंडस्केप के संरक्षित क्षेत्रों में बेदखली और पुनर्वास प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी. आर. गवई करेंगे।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि यह समिति श्रीविल्लिपुत्तुर-मेगामलाई टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले मेगामलाई क्षेत्र में 'वन अधिकार अधिनियम' (FRA) के तहत किए गए दावों की जांच करेगी।
इस समिति की सहायता के लिए 'सेंट्रल एम्पावर्ड कमिटी' (CEC) के एक अधिकारी और तमिलनाडु के 'प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख' (Principal Chief Conservator of Forests and Head of Forest Force) मौजूद रहेंगे। शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायमूर्ति गवई अपनी सहायता के लिए CEC के किसी उपयुक्त अधिकारी को चुन सकते हैं।
समिति FRA के आदेशों की बारीकी से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में सौंपेगी। यह समिति आवश्यक निर्देश जारी करके दावों के त्वरित निपटान की निगरानी करेगी और तुरंत अपना काम शुरू कर देगी।