Sikkim सिक्किम: गंगटोक में आयोजित टेक्नोलॉजी और न्यायिक शिक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीक के बढ़ते उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुधारों के जरिए न्याय तक पहुंच आसान हो रही है और भौगोलिक बाधाएं धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायिक प्रणाली में तकनीक को शामिल करने का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं को तेज करना नहीं है, बल्कि उन लोगों तक न्याय पहुंचाना भी है जो दूर-दराज या कठिन इलाकों में रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक के माध्यम से दूरी, आर्थिक सीमाएं और भौगोलिक चुनौतियां अब पहले की तुलना में कम हो रही हैं।
उन्होंने कहा, “जब हम न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीक को शामिल करते हैं, तो हमारा लक्ष्य भौगोलिक बाधाओं को समाप्त करना होता है, चाहे वे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, आर्थिक सीमाओं या लंबी दूरी के कारण उत्पन्न होती हों।” उनके अनुसार, यह बदलाव विशेष रूप से उन राज्यों और क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां न्यायालय तक पहुंचना पहले बेहद कठिन होता था।
सीजेआई ने पुराने समय की चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया कि Sikkim जैसे राज्यों में लोगों को अदालत तक पहुंचने के लिए कई दिनों का कठिन सफर करना पड़ता था। ऐसे हालात में न्याय प्राप्त करना एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया बन जाती थी। लेकिन अब डिजिटल माध्यमों के जरिए यह स्थिति काफी हद तक बदल रही है।
उन्होंने कहा कि भारत की न्यायिक प्रणाली अब तेजी से डिजिटल इकोसिस्टम की ओर बढ़ रही है। E-Courts Project जैसी पहल ने अदालतों के कामकाज को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम हुई है और कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी बनी है।
मुख्य न्यायाधीश ने National Judicial Data Grid (NJDG) को इस डिजिटल परिवर्तन का “धड़कता दिल” बताया। उन्होंने कहा कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए केस से जुड़ी जानकारी तक रियल-टाइम पहुंच संभव हो पाई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों में सुधार हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक के उपयोग से अदालतों में लंबित मामलों के प्रबंधन में भी सहायता मिल रही है। डिजिटल सिस्टम के जरिए केस ट्रैकिंग, दस्तावेज़ों का प्रबंधन और सुनवाई की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो रही है। इससे न्यायिक प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है।
सम्मेलन में उपस्थित न्यायिक अधिकारियों और विशेषज्ञों से उन्होंने आग्रह किया कि वे तकनीक के उपयोग को और बढ़ावा दें, ताकि न्याय व्यवस्था को और अधिक सुलभ और प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली को समय के साथ बदलना जरूरी है और तकनीक इस बदलाव का प्रमुख माध्यम बन सकती है।
मुख्य न्यायाधीश के इस संबोधन को न्यायिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उनका मानना है कि डिजिटल बदलाव के जरिए न केवल न्यायिक प्रक्रिया में सुधार होगा, बल्कि आम नागरिकों का न्याय प्रणाली पर भरोसा भी मजबूत होगा।
कुल मिलाकर, सीजेआई सूर्यकांत ने यह स्पष्ट किया कि तकनीक के माध्यम से भारत की न्यायिक प्रणाली एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहां न्याय तक पहुंच पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बन रही है।