ग्यालशिंग। सिक्किम के ग्यालशिंग जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने बड़ी तबाही मचाई है। युक्सोम-ताशीडिंग निर्वाचन क्षेत्र के रिम्बी गांव में भीषण भूस्खलन के कारण 32 से अधिक घर और सरकारी क्वार्टर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। भूस्खलन के बाद कई परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और प्रशासन की ओर से बनाए गए राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। प्रभावित इलाके में जमीन लगातार खिसकने के खतरे को देखते हुए लोगों को जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाके की मिट्टी कमजोर होने के बाद ऊपरी ढलानों से बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा नीचे की ओर आ गया। मलबे की चपेट में आने से कई रिहायशी मकानों को नुकसान पहुंचा है। कुछ स्थानों पर जमीन में दरारें पड़ने और लगातार खिसकाव होने से आसपास के दूसरे घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। इससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।

भूस्खलन के बाद प्रभावित परिवारों ने जरूरी सामान के साथ अपने घर खाली कर दिए। कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि बेघर हुए परिवारों के रहने के लिए राहत शिविर की व्यवस्था की गई है। पहाड़ी ढलानों पर लगातार हो रहे भू-स्खलन को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधि हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

रिम्बी पंचायत अध्यक्ष मंगल राय के अनुसार ग्यालशिंग जिले के रिम्बी और सिंगनिथम वार्डों में अगस्त से ही भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं। लगातार जमीन खिसकने के कारण स्थिति पहले से गंभीर बनी हुई थी, लेकिन ताजा बारिश के बाद समस्या और बढ़ गई। उन्होंने बताया कि ताजा घटना में 32 परिवार बेघर हो गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई प्रभावित परिवारों के पास अब रहने के लिए सुरक्षित जमीन तक नहीं बची है।

भूस्खलन से सिर्फ मकानों को ही नुकसान नहीं हुआ, बल्कि पूरे इलाके में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। मलबा आने से कई स्थानों पर आवाजाही मुश्किल हो गई है। ग्रामीणों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश के बीच राहत और बचाव कार्यों में भी मुश्किलें पैदा हो रही हैं।

स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता जमीन का लगातार खिसकना है। पहाड़ी इलाकों में मिट्टी के भीतर पानी भर जाने से जमीन की पकड़ कमजोर हो जाती है। ऐसे में पहले से प्रभावित ढलानों पर दोबारा भूस्खलन होने का खतरा बढ़ जाता है। रिम्बी और आसपास के क्षेत्रों में भी इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। जोखिम को देखते हुए प्रभावित मकानों में लोगों के लौटने को लेकर सावधानी बरती जा रही है।

जिन परिवारों के घर पूरी तरह रहने योग्य नहीं बचे हैं, उनके सामने अब स्थायी पुनर्वास की चुनौती खड़ी हो गई है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि कई परिवारों की जमीन भी भूस्खलन की चपेट में आ गई है। ऐसे में केवल क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा। इन परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए जमीन और आवास की व्यवस्था की आवश्यकता पड़ सकती है।

प्रभावित लोगों को फिलहाल सुरक्षित जगहों और राहत शिविरों में रखा गया है। स्थानीय स्तर पर उनकी जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने की कोशिश की जा रही है। लगातार बारिश के कारण प्रशासन के सामने प्रभावित इलाकों का विस्तृत सर्वेक्षण करना भी चुनौती बना हुआ है। मौसम में सुधार होने के बाद नुकसान का वास्तविक आकलन और स्पष्ट होने की संभावना है।

रिम्बी गांव की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए प्रशासन के लिए आगे का काम भी आसान नहीं है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण भूस्खलन प्रभावित स्थानों तक भारी मशीनरी और राहत सामग्री पहुंचाने में दिक्कत हो सकती है। वहीं अगर बारिश जारी रहती है तो नए स्थानों पर भी जमीन खिसकने की आशंका बनी रहेगी।

स्थानीय प्रतिनिधियों ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता जताई है। उनका कहना है कि अगस्त से लगातार भूस्खलन होने के कारण कई परिवार लंबे समय से असुरक्षा के बीच रह रहे थे। अब ताजा घटना के बाद बड़ी संख्या में लोगों के सामने आवास का संकट पैदा हो गया है। ऐसे परिवारों के लिए सुरक्षित जमीन की पहचान करना प्राथमिकता बन गई है।

भूस्खलन से सरकारी क्वार्टरों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। इससे साफ है कि प्रभावित क्षेत्र का दायरा केवल निजी आवासों तक सीमित नहीं है। प्रशासन की ओर से क्षतिग्रस्त सरकारी और निजी भवनों की स्थिति का आकलन किए जाने के बाद यह तय किया जाएगा कि किन मकानों में दोबारा रहना सुरक्षित है और किन्हें पूरी तरह खाली रखना होगा।

भारी बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए समय रहते निकासी महत्वपूर्ण हो जाती है। रिम्बी में भी खतरे को देखते हुए प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

फिलहाल रिम्बी और सिंगनिथम वार्डों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं। लगातार बारिश थमने और जमीन स्थिर होने के बाद ही प्रभावित परिवारों की वापसी या स्थायी पुनर्वास को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ताजा भूस्खलन ने 32 परिवारों से उनका आशियाना छीन लिया है और कई लोगों के सामने अब सुरक्षित जमीन और नए घर की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

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